मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच दुनिया की सबसे अहम समुद्री व्यापारिक लाइनों में शामिल Strait of Hormuz को लेकर ईरान ने बड़ा बयान दिया है। ईरानी अधिकारियों ने साफ कहा है कि Strait of Hormuz अभी भी बंद है और इसे केवल सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के आदेश पर ही दोबारा खोला जाएगा। इस बयान से वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग इंडस्ट्री और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में चिंता बढ़ गई है।
ईरान का तीखा बयान
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की ओर से कहा गया कि जलडमरूमध्य किसी बाहरी दबाव, सोशल मीडिया पोस्ट या राजनीतिक बयानबाजी से नहीं खुलेगा। फैसला केवल देश के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। इससे साफ संकेत मिला है कि तेहरान इस रणनीतिक मार्ग को कूटनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है Strait of Hormuz ?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला कच्चा तेल और LNG का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से एशिया, यूरोप और अन्य देशों तक पहुंचता है। अनुमान है कि वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रूट से गुजरता है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
जहाजों की आवाजाही पर असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ LNG टैंकरों और व्यापारिक जहाजों ने वैकल्पिक मार्ग अपनाना शुरू कर दिया है। क्षेत्र में फायरिंग और सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण कई जहाज कंपनियां सतर्क रुख अपना रही हैं। इससे बीमा लागत, ट्रांसपोर्ट खर्च और डिलीवरी समय बढ़ सकता है।
भारत पर क्या असर पड़ेगा ?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। यदि हॉर्मुज मार्ग में लंबे समय तक तनाव बना रहता है, तो पेट्रोल-डीजल कीमतों, महंगाई और आयात बिल पर असर पड़ सकता है। साथ ही शिपिंग कॉस्ट बढ़ने से कई सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं।
बाजार की नजर अब खामेनेई पर
अंतरराष्ट्रीय बाजार अब ईरान के अगले कदम और खामेनेई के निर्देश पर नजर लगाए हुए हैं। यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो मार्ग खुल सकता है, लेकिन तनाव बढ़ने पर संकट गहरा सकता है।
Strait of Hormuz पर ईरान का सख्त रुख सिर्फ क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ा मामला बन चुका है। आने वाले दिनों में यह तय करेगा कि तेल बाजार स्थिर रहेगा या नई महंगाई लहर शुरू होगी।
