एशियाई करेंसी पर प्रेशर, डॉलर मजबूत: US-Iran तनाव से बाजारों में हलचल

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक करेंसी बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। सोमवार को एशियाई करेंसी में कमजोरी दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी डॉलर सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग बढ़ने से मजबूत हुआ। इन्वेस्टर की नजर अब भू-राजनीतिक हालात, तेल कीमतों और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर टिकी है।

एशियाई करेंसी क्यों गिरी?

रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही अमेरिका और ईरान के बीच तनाव दोबारा बढ़ा, इन्वेस्टरने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी। इससे जापानी येन को छोड़कर कई एशियाई करेंसी पर प्रेशर बना। ऑस्ट्रेलियन डॉलर, चीनी युआन और अन्य उभरते बाजारों की करेंसी में कमजोरी देखी गई।

डॉलर क्यों हुआ मजबूत?

जब दुनिया में तनाव बढ़ता है, तो निवेशक अक्सर अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित विकल्प मानते हैं। इसी वजह से डॉलर इंडेक्स और डॉलर फ्यूचर्स में करीब 0.2% की तेजी देखी गई। इससे डॉलर एक सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंचा।

US-Iran तनाव का असर क्या है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज कब्जे में लेने और ईरान की तीखी प्रतिक्रिया के बाद तनाव बढ़ा है। साथ ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता ने बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। यह मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।

तेल कीमतों में उछाल

तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आई। Brent Crude लगभग $95 के करीब पहुंचा, जबकि WTI में भी उछाल देखा गया। तेल महंगा होने से आयातक देशों की करेंसी पर अतिरिक्त प्रेशर बन सकता है।

भारतीय रुपये पर क्या असर?

भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए डॉलर मजबूत होना और तेल महंगा होना दोहरी चुनौती बन सकता है। इससे रुपये पर प्रेशर बढ़ सकता है, आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर असर पड़ सकता है। हाल के दिनों में RBI ने डॉलर मांग कम करने के लिए कदम भी उठाए थे।

इन्वेस्टर के लिए क्या संकेत?

  1. करेंसी बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है
  2. तेल आयातक देशों की करेंसी पर प्रेशर रह सकता है
  3. डॉलर मजबूत रहने से गोल्ड और इक्विटी पर असर पड़ सकता है
  4. उभरते बाजारों से पूंजी निकासी संभव है

US-Iran तनाव ने फिर साबित किया है कि भू-राजनीतिक घटनाएं सीधे मुद्रा बाजारों को प्रभावित करती हैं। फिलहाल डॉलर को फायदा मिल रहा है, जबकि एशियाई मुद्राएं प्रेशर में हैं। आने वाले दिनों में यदि तनाव बढ़ता है, तो करेंसी और कमोडिटी बाजारों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *