
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए कथित ‘जॉम्बी ड्रग’ वीडियो का सच आखिरकार सामने आ गया है। पुलिस ने साफ किया है कि वीडियो में दिखाई दे रहा युवक किसी खतरनाक नशे या तथाकथित जॉम्बी ड्रग के असर में नहीं था, बल्कि उसने दर्द निवारक दवा Pregabalin की अधिक मात्रा ले ली थी।
क्या था वायरल वीडियो का मामला?
कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक युवक सड़क पर असामान्य हालत में खड़ा दिखाई दे रहा था। युवक न तो ठीक से चल पा रहा था और न ही सामान्य प्रतिक्रिया दे रहा था। इसके बाद सोशल मीडिया पर दावा किया जाने लगा कि वह किसी ‘जॉम्बी ड्रग’ के असर में है।
वीडियो के वायरल होते ही लोगों में डर और भ्रम का माहौल बन गया था।
पुलिस जांच में सामने आया असली सच
वीडियो सामने आने के बाद मीरा-भायंदर वसई-विरार (MBVV) पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर युवक की पहचान 22 वर्षीय समीर राजेंद्र रावल के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार वह नेपाल का रहने वाला है और मजदूरी का काम करता है।
दर्द की दवा की ओवरडोज से बिगड़ी हालत
पूछताछ में युवक ने बताया कि वह लंबे समय से Pregabalin टैबलेट का सेवन कर रहा था। यह दवा आमतौर पर नसों के दर्द, मिर्गी और एंग्जायटी जैसी समस्याओं में डॉक्टर की सलाह पर दी जाती है। युवक ने कथित तौर पर एक साथ पांच गोलियां खा ली थीं, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई।
पुलिस ने बताया कि यही वजह थी कि वह सड़क पर चक्कर खाकर खड़ा रह गया और सामान्य रूप से चल नहीं पा रहा था।
मेडिकल स्टोर पर भी कार्रवाई की तैयारी
जांच में यह भी सामने आया कि युवक ने यह दवा बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के एक मेडिकल स्टोर से खरीदी थी। पुलिस ने मामले की जानकारी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को दे दी है, ताकि बिना पर्ची दवा बेचने वाले दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
पुलिस की अपील: अफवाहों से बचें
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के किसी भी वीडियो या दावे को शेयर न करें। अफवाहें समाज में डर और भ्रम फैलाती हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
हाल ही में बेंगलुरु में भी एक ऐसा ही वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें ‘जॉम्बी ड्रग’ का दावा किया गया था। बाद में पुलिस जांच में वह दावा भी झूठा निकला।
ठाणे का यह मामला दिखाता है कि सोशल मीडिया पर वायरल हर दावा सच नहीं होता। पुलिस जांच में साफ हो गया है कि यह कोई नया ड्रग खतरा नहीं, बल्कि दवा के गलत इस्तेमाल का मामला था। ऐसे मामलों में जागरूकता और जिम्मेदार सोशल मीडिया व्यवहार बेहद जरूरी है।
