बीजिंग/वॉशिंगटन: दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Meta Platforms को बड़ा झटका लगा है। चीन ने Meta द्वारा AI स्टार्टअप Manus के लगभग $2 अरब अधिग्रहण सौदे को रोक दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी नियामकों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी नियंत्रण और विदेशी निवेश नियमों का हवाला देते हुए इस डील को वापस लेने का आदेश दिया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और चीन के बीच AI तकनीक, चिप्स और डेटा सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक टेक सेक्टर और क्रॉस-बॉर्डर निवेश पर बड़ा असर डाल सकता है।
क्या है पूरा मामला?
Meta ने 2025 के अंत में Singapore-based AI startup Manus को खरीदने की घोषणा की थी। यह डील Meta की AI रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही थी। कंपनी Manus की AI agent तकनीक को अपने प्लेटफॉर्म्स जैसे Facebook, Instagram, WhatsApp और Meta AI में जोड़ना चाहती थी।
लेकिन चीन के National Development and Reform Commission (NDRC) ने अब इस सौदे को रोकते हुए विदेशी निवेश पर आपत्ति जताई है।
Manus क्यों है खास?
Manus एक उभरता हुआ AI startup है जो ऐसे AI agents विकसित करता है जो कम मानवीय हस्तक्षेप में जटिल काम कर सकते हैं। जैसे:
- रिसर्च करना
- डेटा विश्लेषण
- कोडिंग
- ऑटोमेटेड टास्क मैनेजमेंट
- बिजनेस workflows
यही वजह है कि Meta इस कंपनी को अपनी AI रेस में बड़ा हथियार मान रही थी।
चीन ने क्यों रोकी डील?
विश्लेषकों के अनुसार चीन के फैसले के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
- घरेलू AI तकनीक को विदेशी कंपनियों से बचाना
- संवेदनशील टेक्नोलॉजी का बाहर जाना रोकना
- अमेरिकी निवेश पर सख्ती
- राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएं
- चीन की AI कंपनियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाना
Meta को कितना नुकसान?
यदि यह सौदा पूरी तरह रद्द होता है तो Meta को:
- AI expansion strategy में देरी
- प्रतिस्पर्धियों OpenAI, Google, Microsoft से दबाव
- talent acquisition में झटका
- निवेशकों की चिंता
जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
ग्लोबल बाजार के लिए संकेत
यह फैसला बताता है कि अब AI सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि भूराजनीतिक शक्ति बन चुका है। आने वाले समय में AI deals, foreign investments और cross-border acquisitions पर ज्यादा regulatory scrutiny देखने को मिल सकती है।
चीन द्वारा Meta-Manus डील रोकना सिर्फ एक कारोबारी फैसला नहीं, बल्कि AI dominance की वैश्विक लड़ाई का संकेत है। इससे साफ है कि आने वाले वर्षों में AI सेक्टर में राजनीति, सुरक्षा और निवेश तीनों साथ चलेंगे।
