भारतीय मुद्रा बाजार में रुपये पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मुंबई करेंसी मार्केट में डॉलर के मुकाबले रुपया आज फिर कमजोर होकर अपने नए रिकॉर्ड निचले स्तर 95.81 तक पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती, बढ़ते क्रूड ऑयल दाम और भारत के घटते फॉरेक्स रिजर्व के कारण रुपये में भारी गिरावट देखने को मिली।
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि रुपया इसी तरह कमजोर होता रहा तो देश में महंगाई और आयात लागत दोनों तेजी से बढ़ सकती हैं। खासतौर पर पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य तेल और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों पर इसका असर दिखाई दे सकता है।
दिनभर कैसे रहा रुपया?
मुंबई इंटरबैंक करेंसी मार्केट में डॉलर का शुरुआती भाव 95.60 रुपये पर खुला। शुरुआती कारोबार में डॉलर थोड़ी कमजोरी के साथ 95.51 तक नीचे आया, लेकिन बाद में डॉलर में खरीदारी बढ़ने से यह तेजी से उछलकर 95.81 के नए उच्च स्तर तक पहुंच गया।
दिन के अंत में डॉलर लगभग 95.77 रुपये के आसपास कारोबार करता देखा गया। डॉलर के मुकाबले रुपया आज करीब 13 पैसे यानी 0.14% कमजोर हुआ।
मुद्रा बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम होने और विदेशी निवेश निकासी के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है।
सरकार के कदम भी नहीं रोक पाए गिरावट
हाल ही में केंद्र सरकार ने विदेशी मुद्रा बचाने और आयात कम करने के उद्देश्य से सोना-चांदी की आयात ड्यूटी बढ़ाने का फैसला किया था। माना जा रहा था कि इससे डॉलर की मांग कम होगी और रुपये को कुछ राहत मिल सकती है।
लेकिन इसके बावजूद रुपये में गिरावट जारी रही। बाजार जानकारों के अनुसार वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की सतर्कता ने सरकारी कदमों का असर सीमित कर दिया।
डॉलर इंडेक्स में मजबूती से बढ़ा दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत बना हुआ है। प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर इंडेक्स लगभग 0.25% बढ़कर 98.54 तक पहुंच गया।
अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें, मजबूत आर्थिक आंकड़े और सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग बढ़ने से वैश्विक बाजारों में अमेरिकी मुद्रा मजबूत बनी हुई है। इसका सीधा असर उभरते देशों की मुद्राओं पर पड़ रहा है, जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है।
फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट बनी चिंता
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के विदेशी मुद्रा भंडार यानी Forex Reserves में हाल के सप्ताहों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। इसी कारण बाजार में यह चर्चा तेज है कि RBI अब रुपये को स्थिर रखने के लिए किस प्रकार की रणनीति अपनाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रुपया और कमजोर होता है तो RBI बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप कर सकता है। इसके अलावा ब्याज दर नीति और लिक्विडिटी मैनेजमेंट जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
फिलहाल बाजार की नजर RBI के अगले संकेतों और हस्तक्षेप पर टिकी हुई है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बढ़ा रहीं मुश्किल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी भी रुपये पर दबाव बढ़ा रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने पर देश का Import Bill बढ़ जाता है।
इससे व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़ने की आशंका रहती है और डॉलर की मांग बढ़ जाती है। यही कारण है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर सीधे रुपये पर दिखाई देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि Middle East तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट जारी रहा तो आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है।
अन्य विदेशी मुद्राओं का हाल
मुंबई करेंसी बाजार में आज ब्रिटिश पाउंड मजबूत होकर 129.47 रुपये के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। दिन में इसका उच्च स्तर 129.62 रुपये और निचला स्तर 129.32 रुपये रहा।
वहीं यूरो में हल्की कमजोरी रही और यह करीब 112.08 रुपये पर बंद हुआ। जापानी येन और चीनी युआन में भी सीमित बढ़त देखने को मिली।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
रुपये की कमजोरी का असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। यदि डॉलर लगातार महंगा होता है तो आयातित वस्तुएं महंगी हो जाएंगी। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, पेट्रोल-डीजल, एयर टिकट और विदेश में पढ़ाई की लागत बढ़ सकती है।
इसके अलावा कंपनियों की आयात लागत बढ़ने से बाजार में महंगाई का दबाव और तेज हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि RBI जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाता तो आने वाले महीनों में महंगाई नियंत्रण चुनौती बन सकती है।
