NEET को ऑनलाइन कराने की तैयारी में बड़ी चुनौती: 23 लाख छात्रों के लिए ‘सिंगल शिफ्ट’ बना सबसे बड़ा सवाल

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को Computer Based Test (CBT) यानी ऑनलाइन मोड में कराने की चर्चा फिर तेज हो गई है। लगातार पेपर लीक विवादों और परीक्षा प्रणाली पर उठते सवालों के बीच सरकार और National Testing Agency (NTA) परीक्षा को डिजिटल बनाने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन 23 लाख से ज्यादा छात्रों के लिए एक ही शिफ्ट में परीक्षा आयोजित करना सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार NEET परीक्षा को पूरी तरह ऑनलाइन कराने के लिए देशभर में पर्याप्त कंप्यूटर लैब, इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित परीक्षा केंद्रों की भारी कमी है। यही वजह है कि फिलहाल NEET को एक ही दिन और एक ही शिफ्ट में CBT मोड में कराना बेहद मुश्किल माना जा रहा है।

क्यों बदलना चाहती है सरकार परीक्षा का फॉर्मेट?

NEET-UG पिछले कुछ वर्षों से लगातार विवादों में रही है। 2024 और 2026 दोनों वर्षों में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोपों ने NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। हाल ही में NEET-UG 2026 परीक्षा को कथित “Guess Paper Leak” विवाद के बाद रद्द भी करना पड़ा।

इन्हीं घटनाओं के बाद Education Ministry और NTA परीक्षा प्रणाली को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन मोड पर विचार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि Computer Based Test से पेपर लीक की संभावना कम हो सकती है और परीक्षा प्रबंधन अधिक नियंत्रित तरीके से किया जा सकेगा।

सबसे बड़ी दिक्कत: 23 लाख छात्रों के लिए कंप्यूटर कहां से आएंगे?

NEET देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। हर साल करीब 23 लाख छात्र परीक्षा देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के लिए एक साथ कंप्यूटर उपलब्ध कराना बहुत कठिन है।

तुलना करें तो इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main कई शिफ्टों में आयोजित की जाती है और उसमें कुल परीक्षार्थियों की संख्या NEET से काफी कम होती है। लेकिन NEET को मल्टीपल शिफ्ट में कराने पर “Normalization” और “Difficulty Level Variation” जैसी नई समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। मेडिकल छात्रों और विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि सभी छात्रों के लिए एक समान प्रश्नपत्र और एक ही समय पर परीक्षा हो।

‘सिंगल शिफ्ट’ मॉडल क्यों जरूरी माना जा रहा?

विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा में रैंक का अंतर बहुत कम अंकों पर तय होता है। ऐसे में यदि अलग-अलग शिफ्टों में परीक्षा होती है तो पेपर की कठिनाई में मामूली अंतर भी लाखों छात्रों की रैंकिंग प्रभावित कर सकता है।

इसी वजह से National Medical Commission (NMC) और Health Ministry फिलहाल NEET को एक ही शिफ्ट में आयोजित करने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। दूसरी तरफ Education Ministry और NTA डिजिटल मोड की तरफ बढ़ना चाहते हैं ताकि पेपर सुरक्षा मजबूत की जा सके।

Hybrid Model पर भी हो रहा विचार

रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार अब Hybrid Examination Model पर भी विचार कर रही है। इसमें प्रश्नपत्र डिजिटल तरीके से परीक्षा केंद्रों तक भेजे जाएंगे और वहीं सुरक्षित तरीके से प्रिंट किए जाएंगे। इससे प्रश्नपत्र के ट्रांसपोर्टेशन के दौरान लीक होने का खतरा कम हो सकता है।

यह मॉडल पूरी तरह ऑनलाइन परीक्षा और पारंपरिक पेन-पेपर परीक्षा के बीच का विकल्प माना जा रहा है। हालांकि इसे लागू करने के लिए भी हाई-सिक्योरिटी प्रिंटिंग सिस्टम और तकनीकी निगरानी की जरूरत होगी।

Radhakrishnan Panel की सिफारिशें अभी अधूरी

2024 के NEET विवाद के बाद पूर्व ISRO प्रमुख K Radhakrishnan की अध्यक्षता में गठित समिति ने परीक्षा प्रणाली में कई बड़े सुधार सुझाए थे। इनमें डिजिटल सुरक्षा, एन्क्रिप्टेड पेपर डिलीवरी और परीक्षा केंद्रों की निगरानी बढ़ाने जैसी सिफारिशें शामिल थीं। लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार इन सुधारों का बड़ा हिस्सा अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है।

इसी कारण NEET-UG 2026 में फिर से गड़बड़ियों के आरोप सामने आए और अब परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की मांग तेज हो गई है।

छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता

लगातार विवादों के कारण छात्रों और अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई छात्र ऑनलाइन परीक्षा का समर्थन कर रहे हैं क्योंकि इससे पेपर लीक का खतरा कम हो सकता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कंप्यूटर आधारित परीक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि NEET जैसी परीक्षा को पूरी तरह डिजिटल बनाने से पहले देशभर में परीक्षा केंद्रों, इंटरनेट सुविधा और कंप्यूटर लैब की क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाना होगा। अन्यथा तकनीकी गड़बड़ियां और असमान संसाधन नए विवाद खड़े कर सकते हैं।

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