‘100 सिर्फ एक नंबर है, रुपये को गिरने दो…’ RBI को फाइनेंशियल कमिश्न प्रमुख की चौंकाने वाली सलाह

नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तेल संकट और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच भारतीय रुपया लगातार दबाव में है। डॉलर के मुकाबले रुपया 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर बढ़ रहा है। इसी बीच 16वें फाइनेंशियल कमिश्न के अध्यक्ष और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को एक चौंकाने वाली सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि RBI को रुपये को बचाने के लिए अत्यधिक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, क्योंकि “100 सिर्फ एक नंबर है।”

रुपये को बचाने की कोशिश नुकसानदायक!

Finance Commission Chief Arvind Panagariya Advise RBI : अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि मौजूदा वैश्विक तेल संकट के दौरान रुपये का कमजोर होना अर्थव्यवस्था के लिए एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। उनका मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये को कृत्रिम रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार खर्च करना लंबे समय में नुकसानदायक साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा, “100 कोई जादुई आंकड़ा नहीं है। जैसे 99 और 101 सामान्य स्तर हैं, वैसे ही 100 भी सिर्फ एक संख्या है। बाजार की वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार मुद्रा का मूल्य तय होना चाहिए।”

विदेशी मुद्रा भंडार खाली होने का खतरा

पनगढ़िया ने चेतावनी दी कि अगर मिडिल ईस्ट का संकट लंबे समय तक चलता है, तो RBI चाहे जितना डॉलर बाजार में बेचे, एक समय बाद विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर दबाव बढ़ जाएगा। इससे देश की वित्तीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि ऊंची ब्याज दरों वाले NRI डिपॉजिट या डॉलर बॉन्ड जारी करना भी स्थायी समाधान नहीं है। इससे केवल अमीर प्रवासी भारतीयों को फायदा मिलेगा और देश पर महंगा विदेशी कर्ज बढ़ेगा।

रुपया कमजोर होने से क्या फायदा?

पनगढ़िया के मुताबिक, रुपये में गिरावट से भारतीय निर्यात को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश करना सस्ता लगेगा, जिससे विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ सकता है।

उन्होंने कहा कि अगर तेल संकट कुछ महीनों तक सीमित रहता है, तो बाद में तेल आयात बिल कम होने के साथ रुपया अपने आप मजबूत हो सकता है।

2013 जैसी स्थिति नहीं

उन्होंने 2013 के मुद्रा संकट और मौजूदा हालात की तुलना करते हुए कहा कि आज भारत की अर्थव्यवस्था कहीं अधिक मजबूत है। उस समय महंगाई दोहरे अंकों में थी और आर्थिक अस्थिरता ज्यादा थी, जबकि वर्तमान में भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है।

पनगढ़िया का मानना है कि भारत मौजूदा परिस्थितियों में रुपये के अवमूल्यन से पैदा होने वाले महंगाई दबाव को संभालने में सक्षम है।

अभी क्या है रुपये की स्थिति?

हाल ही में रुपया डॉलर के मुकाबले 96.95 के ऐतिहासिक निचले स्तर तक पहुंच गया था और 96.86 पर बंद हुआ। हालांकि बाद में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक तनाव कम होने से रुपया थोड़ा संभला और 96.37 पर बंद हुआ।

इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक संकट जारी रहा, तो आने वाले समय में रुपया डॉलर के मुकाबले 100 का स्तर पार कर सकता है।

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