देश में मई महीने के दौरान तीसरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। केंद्र सरकार ने ईंधन की बढ़ती कीमतों के लिए विपक्ष शासित राज्यों द्वारा लगाए जा रहे ऊंचे VAT (वैट) को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद भारत ने 76 दिनों तक इसका बोझ काफी हद तक खुद उठाया और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कुल बढ़ोतरी 5 रुपये प्रति लीटर से कम रखी गई।
सरकार के अनुसार, पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) पूरे देश में समान है, लेकिन अलग-अलग राज्यों में VAT की दरें अलग होने के कारण कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। केंद्र ने कहा कि जिन राज्यों में VAT ज्यादा है, वहां पेट्रोल की कीमतें 112 रुपये प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गई हैं।
इन राज्यों में सबसे महंगा पेट्रोल
केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल में पेट्रोल की कीमत 112 रुपये प्रति लीटर से अधिक हो गई है। सरकार ने दावा किया कि इन राज्यों में सबसे ज्यादा VAT लगाया जा रहा है।
- आंध्र प्रदेश में 31% VAT के साथ प्रति लीटर अतिरिक्त चार रुपये और रोड डेवलपमेंट सेस लगाया जा रहा है।
- तेलंगाना में पेट्रोल की कीमत करीब 116 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है।
- केरल में बेस VAT के ऊपर सोशल सिक्योरिटी सेस भी लगाया जा रहा है।
केंद्र ने यह भी कहा कि गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, गोवा और असम जैसे BJP शासित राज्यों में पेट्रोल की कीमत 102 रुपये प्रति लीटर या उससे कम है।
केंद्र और विपक्ष के बीच बढ़ी सियासी तकरार
केंद्र सरकार ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो राज्य केंद्र से एक्साइज ड्यूटी कम करने की मांग करते हैं, उन्होंने खुद अपने राज्यों में VAT कम नहीं किया। सरकार का दावा है कि मार्च 2026 में केंद्र द्वारा 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद BJP शासित राज्यों ने इसका पूरा लाभ जनता तक पहुंचाया, जबकि विपक्षी राज्यों ने VAT में कटौती नहीं की।
तीसरी बार बढ़ी कीमतें
शनिवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 1 रुपये से कम की बढ़ोतरी की गई। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गया। इससे पहले भी मई में दो बार ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की जा चुकी है।
सरकार का कहना है कि ईरान युद्ध और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण यह बढ़ोतरी करनी पड़ी। अप्रैल 2022 के बाद यह पहली बड़ी ईंधन मूल्य वृद्धि मानी जा रही है।
