पश्चिम बंगाल चुनाव विवाद के बीच बड़ा घटनाक्रम, जस्टिस टी.एस. शिवगणनम ने SIR ट्रिब्यूनल से दिया इस्तीफा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद मतदाता सूची संशोधन विवाद के बीच बड़ा कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश Justice T.S. Sivagnanam ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अपीलीय ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दे दिया है। यह वही ट्रिब्यूनल था जिसे चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची से हटाए गए नामों से जुड़ी अपीलों की सुनवाई के लिए गठित किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक जस्टिस शिवगणनम ने “व्यक्तिगत कारणों” का हवाला देते हुए पद छोड़ा, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि मौजूदा गति से लंबित अपीलों को निपटाने में लगभग चार साल लग सकते हैं। इस बयान ने पूरे SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है SIR विवाद?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले चुनाव आयोग ने Special Intensive Revision (SIR) अभियान चलाया था। इस प्रक्रिया के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। विपक्षी दलों, खासकर तृणमूल कांग्रेस (TMC), ने आरोप लगाया कि इस अभियान के जरिए बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं को वोटिंग अधिकार से वंचित किया गया।

विकिपीडिया और अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 83 लाख से अधिक मतदाता नाम हटाए गए, जो कुल मतदाताओं का करीब 10 प्रतिशत से ज्यादा था।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बने थे ट्रिब्यूनल

मतदाता सूची विवाद बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाने का निर्देश दिया था। इसके बाद 19 सेवानिवृत्त जजों को विभिन्न क्षेत्रों में अपीलों की सुनवाई की जिम्मेदारी दी गई थी। जस्टिस टी.एस. शिवगणनम को कोलकाता ट्रिब्यूनल का प्रमुख बनाया गया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने केवल 22 दिनों में 1,777 अपीलों का निपटारा किया था। यह संख्या चुनाव आयोग द्वारा बहाल किए गए कुल मतदाताओं से भी अधिक बताई जा रही है। इसी कारण उनकी कार्यशैली और फैसलों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

TMC ने सुप्रीम कोर्ट में उठाया मुद्दा

तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया है कि पश्चिम बंगाल की 31 विधानसभा सीटों पर हटाए गए मतदाताओं की संख्या बीजेपी की जीत के अंतर से अधिक थी। पार्टी का कहना है कि SIR प्रक्रिया ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया हो सकता है।

वहीं बीजेपी ने SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए इसे फर्जी वोटरों और अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई बताया है।

कौन हैं जस्टिस टी.एस. शिवगणनम?

Justice T.S. Sivagnanam कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट दोनों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। सितंबर 2025 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें SIR ट्रिब्यूनल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

राजनीतिक और कानूनी असर

जस्टिस शिवगणनम के इस्तीफे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष इस मुद्दे को लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों से जोड़कर देख रहा है, जबकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि लंबित अपीलों का भारी बोझ चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।

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