दुनिया में किसी देश की अंतरराष्ट्रीय छवि उसकी विदेश नीति, सैन्य गतिविधियों, राजनीतिक फैसलों और मानवाधिकार रिकॉर्ड जैसे कई मुद्दों से प्रभावित होती है। World Population Review की एक वैश्विक सूची के अनुसार, सबसे अधिक नापसंद किए जाने वाले देशों में चीन पहले, अमेरिका दूसरे और रूस तीसरे स्थान पर हैं। वहीं पाकिस्तान छठे और भारत 10वें स्थान पर बताया गया है।
यह रैंकिंग किसी देश के आम नागरिकों के बारे में राय नहीं, बल्कि मुख्य रूप से उसकी सरकारी नीतियों, अंतरराष्ट्रीय फैसलों और वैश्विक छवि से जुड़े नजरिए को दर्शाती है।
चीन, अमेरिका और रूस क्यों हैं टॉप पर?
चीन को कड़े सरकारी नियंत्रण, मानवाधिकार संबंधी आलोचनाओं, ताइवान और दक्षिण चीन सागर पर उसके रुख के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ता है।
अमेरिका की वैश्विक छवि पर विदेशों में सैन्य हस्तक्षेप, आर्थिक प्रतिबंधों और घरेलू राजनीतिक ध्रुवीकरण जैसे मुद्दों का असर बताया जाता है।
रूस की अंतरराष्ट्रीय छवि यूक्रेन युद्ध, राजनीतिक स्वतंत्रता से जुड़े सवालों और पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते तनाव के कारण प्रभावित हुई है।
पाकिस्तान छठे और भारत 10वें स्थान पर
सूची में उत्तर कोरिया, इजरायल, ईरान, सीरिया और इराक जैसे देश भी शामिल हैं। इन देशों की वैश्विक छवि पर परमाणु कार्यक्रम, राजनीतिक दमन, सैन्य संघर्ष और मानवीय संकट जैसे मुद्दों का प्रभाव पड़ता रहा है।
पाकिस्तान को राजनीतिक अस्थिरता, चरमपंथ से जुड़ी चिंताओं और पड़ोसी देशों के साथ तनाव जैसे कारणों से आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है।
वहीं, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में शामिल होने के बावजूद भारत को 10वें स्थान पर रखा गया है। अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक बहस और मीडिया में उठने वाले विभिन्न मुद्दे किसी देश की वैश्विक धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
विकसित देश भी Top-20 में
सूची में UK, जापान, जर्मनी, इटली और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित और आर्थिक रूप से मजबूत देश भी शामिल बताए गए हैं। ऐतिहासिक घटनाएं, विदेश नीति, राजनीतिक फैसले और क्षेत्रीय तनाव किसी देश की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता या नापसंदगी को प्रभावित कर सकते हैं।
निष्कर्ष
किसी देश की वैश्विक छवि केवल उसकी आर्थिक ताकत से तय नहीं होती। विदेश नीति, युद्ध और संघर्ष, राजनीतिक निर्णय, मानवाधिकारों पर बहस और ऐतिहासिक भूमिका भी अंतरराष्ट्रीय धारणा को प्रभावित करती है।
हालांकि, ऐसी रैंकिंग को सर्वे की पद्धति और डेटा स्रोत के संदर्भ में समझना जरूरी है, क्योंकि “सबसे नापसंद देश” जैसी अवधारणा अलग-अलग सर्वे और क्षेत्रों में काफी अलग परिणाम दे सकती है।
