नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन संकट का असर अब भारत के दवा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। पेट्रोल-डीजल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब केंद्र सरकार 384 आवश्यक और जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों में अस्थायी “इमरजेंसी प्राइस हाइक” की अनुमति दे सकती है। इससे आम लोगों की जेब पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ पड़ने की आशंका है।
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA), फार्मास्यूटिकल्स विभाग और वाणिज्य मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय चर्चा चल रही है। सरकार इस मूल्य वृद्धि को अस्थायी रखने पर विचार कर रही है और अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने पर कीमतें वापस घटाई जा सकती हैं।
दवाओं की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
भारतीय फार्मा उद्योग का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण दवाएं बनाने में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) और अन्य केमिकल्स की कीमतों में 200% से 300% तक उछाल आ चुका है।
इसके अलावा:
- पैकेजिंग मटेरियल महंगा हो गया है
- अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ गई है
- सप्लाई चेन बाधित होने से उत्पादन लागत तेजी से बढ़ी है
इन्हीं कारणों से दवा कंपनियां कीमतों में राहत की मांग कर रही हैं।
किन दवाओं की कीमत बढ़ सकती है?
सरकारी चर्चा में शामिल दवाओं में कई जरूरी और आम इस्तेमाल वाली दवाएं शामिल हैं:
एंटीबायोटिक्स
- एमोक्सिसिलिन (Amoxicillin)
- एज़िथ्रोमाइसिन (Azithromycin)
हृदय और ब्लड प्रेशर की दवाएं
- एम्लोडिपाइन (Amlodipine)
- एटोरवास्टेटिन (Atorvastatin)
दर्द और बुखार की दवाएं
- पैरासिटामोल (Paracetamol)
स्टेरॉयड और विटामिन
- डेक्सामेथासोन (Dexamethasone)
- एस्कॉर्बिक एसिड (Vitamin C)
पेट्रोल-डीजल की महंगाई से बढ़ा दबाव
हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग ₹3.90 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। नई दिल्ली में पेट्रोल ₹98.64 और डीजल ₹91.58 प्रति लीटर तक पहुंच चुका है। ईंधन महंगा होने से परिवहन और वितरण लागत भी बढ़ रही है, जिसका असर दवा उद्योग पर पड़ रहा है।
सरकार ने लोगों से क्या अपील की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन की बचत करने, गैरजरूरी विदेशी यात्राएं टालने और सोने की खरीद पर नियंत्रण रखने की अपील की है, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाते के घाटे (CAD) पर दबाव कम किया जा सके।
LPG सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार भारत के पास फिलहाल पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक है। लेकिन एलपीजी (LPG) को लेकर चिंता बनी हुई है, क्योंकि भारत अपनी लगभग 60% एलपीजी जरूरत आयात से पूरी करता है और उसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से आता है, जहां युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
सरकार अब घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों पर फोकस कर रही है।
