West Bengal में अवैध घुसपैठ के खिलाफ सरकार ने अब बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। राज्य सरकार की नई ‘Detect, Delete and Deport’ नीति लागू होने के बाद बांग्लादेश सीमा पर भारी हलचल देखने को मिल रही है।
सरकारी कार्रवाई के डर से बड़ी संख्या में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिक अब खुद ही सीमा पार कर वापस लौटने की कोशिश कर रहे हैं।
बॉर्डर पर लगी लंबी कतारें
उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट स्थित हकीमपुर चेकपोस्ट पर मंगलवार सुबह 100 से अधिक बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं जमा हो गए।
ये सभी लोग अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर स्वेच्छा से वापस बांग्लादेश जाना चाहते थे।
बताया जा रहा है कि पुलिस कार्रवाई और सरकार द्वारा बनाए जा रहे होल्डिंग सेंटरों के डर से कई अवैध प्रवासी अब खुद सीमा तक पहुंच रहे हैं।
यह घटनाक्रम सरकार की ‘Detect, Delete and Deport’ नीति की घोषणा के बाद तेजी से सामने आया है।
CAA के दायरे से बाहर लोगों पर कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो लोग Citizenship Amendment Act यानी CAA के कानूनी दायरे में नहीं आते, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा।
पुलिस ऐसे संदिग्ध लोगों को पकड़कर Border Security Force यानी BSF को सौंपेगी।
इसी के तहत राज्य में अलग-अलग जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाए जा रहे हैं, जहां संदिग्ध नागरिकों को अस्थायी रूप से रखा जाएगा।
मालदा में शुरू हुआ पहला होल्डिंग सेंटर
Malda देश का पहला ऐसा जिला बन गया है जहां यह नया होल्डिंग सेंटर सक्रिय हो चुका है।
मालदा के इंग्लिश बाजार इलाके के चंदन पार्क स्थित सेंटर में फिलहाल 9 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है, जिनमें 3 महिलाएं और 6 नाबालिग शामिल हैं।
इस सेंटर में 24 घंटे CCTV निगरानी की जा रही है और पुलिस के साथ सिविल डिफेंस स्टाफ भी तैनात है।
संदिग्ध लोगों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है और उनकी बायोमेट्रिक जानकारी केंद्रीय डेटाबेस में अपलोड की जा रही है।
नई व्यवस्था के तहत किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को 30 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है।
नया कानून और ज्यादा सख्त
सरकार की इस कार्रवाई को नए ‘Immigration and Foreigners Act 2026’ से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस कानून के तहत अब हेड कॉन्स्टेबल या उससे ऊपर रैंक के पुलिस अधिकारियों को भी बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार दिया गया है।
सरकार का कहना है कि नया कानून पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी और डिपोर्टेशन सिस्टम पर काम करेगा।
बंगाल में तेज हुई राजनीतिक बहस
इस अभियान के बाद West Bengal में नागरिकता और घुसपैठ का मुद्दा फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
भाजपा नेताओं ने इस अभियान का समर्थन करते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है।
वहीं सरकार ने साफ किया है कि CAA के तहत आने वाले हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा।
नियमों के अनुसार, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2024 से पहले भारत आए अल्पसंख्यकों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
