केरल की राजनीति में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विपक्षी नेता पिनराई विजयन तथा उनकी बेटी वीणा विजयन से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। ईडी की यह कार्रवाई राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कुल 10 स्थानों पर की गई, जिसमें कन्नूर और तिरुवनंतपुरम स्थित आवास भी शामिल थे। छापेमारी खत्म होने के बाद माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और ईडी अधिकारियों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जब ईडी अधिकारी कार्रवाई पूरी कर बाहर निकल रहे थे, तब CPI(M) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें घेर लिया। कई जगहों पर केंद्रीय एजेंसियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अधिकारियों को बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी। कुछ स्थानों पर कथित तौर पर पथराव और धक्का-मुक्की की घटनाएं भी सामने आईं।
सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि ईडी का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना से किया जा रहा है। पार्टी महासचिव एम. ए. बेबी ने कहा कि यह कार्रवाई भाजपा और आरएसएस की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विपक्षी नेताओं को डराना और दबाव बनाना है।
उन्होंने कहा कि देश में पहले भी कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का उदाहरण देते हुए कहा कि अदालतों ने बाद में कई मामलों में राहत दी, जिससे जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल में आगामी राजनीतिक समीकरणों और विपक्ष की रणनीति के बीच ईडी की यह कार्रवाई बड़ा मुद्दा बन सकती है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि जांच एजेंसियां कानून के अनुसार काम कर रही हैं और अगर कोई दोषी नहीं है तो उसे डरने की जरूरत नहीं है।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर राज्य में राजनीतिक माहौल बेहद गर्म हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बड़ा टकराव देखने को मिल सकता है।
