अमेरिका के इमिग्रेशन नियमों को लेकर हाल ही में एक बड़ा बदलाव चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) की नई व्याख्या के बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि अब ग्रीन कार्ड पाने के इच्छुक सभी आवेदकों को स्थायी निवास (Permanent Residency) की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अमेरिका छोड़कर अपने देश लौटना होगा और वहां से कॉन्सुलर प्रोसेसिंग करानी होगी। हालांकि, अब अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है।
क्या है नया नियम?
अब तक कई विदेशी नागरिक अमेरिका में रहते हुए ही “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” (Adjustment of Status) प्रक्रिया के जरिए ग्रीन कार्ड प्राप्त कर सकते थे। लेकिन नई व्याख्या के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे लोगों को ग्रीन कार्ड के लिए देश छोड़ना अनिवार्य होगा।
USCIS के प्रवक्ता ज़ैक काहलर के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य इमिग्रेशन कानून के मूल उद्देश्य को फिर से लागू करना है। उनका कहना है कि जो लोग H-1B, F-1, H-4 जैसे अस्थायी वीजा पर अमेरिका आते हैं, उन्हें स्थायी निवास की प्रक्रिया के लिए उचित कानूनी मार्ग का पालन करना चाहिए ताकि अस्थायी वीजा प्रणाली का दुरुपयोग न हो।
क्या सभी को अमेरिका छोड़ना होगा?
DHS ने स्पष्ट किया है कि यह कोई पूर्ण नीति परिवर्तन (Policy Shift) नहीं है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर ग्रीन कार्ड आवेदक को अमेरिका छोड़ना ही पड़ेगा।
अधिकारियों को प्रत्येक मामले की व्यक्तिगत समीक्षा (Case-by-Case Review) करने का अधिकार दिया गया है। यानी हर आवेदन का निर्णय उसकी परिस्थितियों और पात्रता के आधार पर किया जाएगा।
किन लोगों को मिल सकती है छूट?
नई व्यवस्था के तहत कुछ विशेष श्रेणियों के आवेदकों को अमेरिका में रहकर ही अपनी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति मिल सकती है।
1. आर्थिक योगदान देने वाले आवेदक
यदि कोई व्यक्ति अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, निवेश कर रहा है या रोजगार सृजन में भूमिका निभा रहा है, तो उसे छूट मिल सकती है।
2. राष्ट्रीय हित से जुड़े लोग
जो आवेदक अमेरिका के राष्ट्रीय हित (National Interest) से जुड़े कार्यों में योगदान दे रहे हैं, उन्हें भी देश छोड़े बिना अपनी प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी जा सकती है।
USCIS के प्रवक्ता ज़ैक काहलर के अनुसार, “जो लोग आर्थिक लाभ पहुंचाते हैं या राष्ट्रीय हित में कार्य कर रहे हैं, वे संभवतः अपनी वर्तमान प्रक्रिया जारी रख सकेंगे। अन्य मामलों में अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर विदेश में प्रोसेसिंग का निर्देश दिया जा सकता है।”
प्रवासियों पर क्या होगा असर?
DHS की इस स्पष्टता से हजारों प्रवासियों को राहत मिली है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो गया है कि सभी आवेदकों पर एक समान नियम लागू नहीं होगा।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अब ग्रीन कार्ड आवेदनों की जांच और अधिक सख्ती से की जा सकती है। जिन आवेदकों का मामला राष्ट्रीय हित या आर्थिक योगदान की श्रेणी में नहीं आता, उन्हें विदेश जाकर कॉन्सुलर प्रोसेसिंग पूरी करने के लिए कहा जा सकता है।
भारतीय पेशेवरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर H-1B, H-4 और F-1 वीजा पर रहते हैं। ऐसे में यह नीति विशेष रूप से भारतीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि DHS ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रत्येक मामले का मूल्यांकन अलग-अलग किया जाएगा। फिर भी, ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में शामिल लोगों को अपने दस्तावेजों और पात्रता मानदंडों को लेकर अधिक सावधानी बरतनी होगी।
नई नीति के बाद आने वाले महीनों में USCIS द्वारा जारी अतिरिक्त दिशा-निर्देशों पर भी नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि वही यह तय करेंगे कि व्यवहारिक स्तर पर इन नियमों का प्रभाव कितना व्यापक होगा।
