नई दिल्ली/नैरोबी: वैश्विक ऊर्जा संकट का असर अब सीधे लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। अफ्रीका और दक्षिण एशिया के कई देशों में महंगे LPG, गैस सप्लाई संकट और बढ़ती महंगाई के कारण लाखों परिवार फिर से लकड़ी, कोयला और पारंपरिक ईंधन पर लौटने को मजबूर हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे स्वास्थ्य, पर्यावरण और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ऊर्जा कीमतों में हालिया उछाल, मध्य-पूर्व तनाव और सप्लाई चेन बाधाओं के कारण गरीब और निम्न आय वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। जिन परिवारों ने पिछले वर्षों में LPG या स्वच्छ ईंधन अपनाया था, वे अब दोबारा सस्ते लेकिन प्रदूषणकारी विकल्पों की ओर जा रहे हैं।
रसोई गैस महंगी, लोग फिर पुराने ईंधन पर
कई देशों में LPG सिलेंडर की कीमतें बढ़ने और उपलब्धता घटने से लोगों के पास सीमित विकल्प बचे हैं। विशेष रूप से शहरी झुग्गी बस्तियों और ग्रामीण इलाकों में परिवार:
- लकड़ी जलाकर खाना बना रहे हैं
- कोयले के चूल्हे इस्तेमाल कर रहे हैं
- मिट्टी तेल और असुरक्षित ईंधन का सहारा ले रहे हैं
- भोजन की संख्या घटा रहे हैं
महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
विशेषज्ञों के मुताबिक यह संकट सबसे ज्यादा महिलाओं और बच्चों को प्रभावित करता है। कारण:
- ईंधन जुटाने में अधिक समय लगता है
- धुएं से सांस की बीमारी बढ़ती है
- बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है
- महिलाओं की सुरक्षा जोखिम बढ़ता है
पर्यावरण पर भी खतरा
लकड़ी और कोयले की मांग बढ़ने से जंगलों पर दबाव बढ़ सकता है। कई क्षेत्रों में अवैध कटाई, जैव विविधता नुकसान और वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ रही है। संरक्षण एजेंसियों के लिए भी ईंधन महंगा होने से निगरानी मुश्किल हो रही है।
दक्षिण एशिया क्यों ज्यादा संवेदनशील?
दक्षिण एशिया के कई देश तेल और गैस आयात पर निर्भर हैं। इसलिए वैश्विक कीमत बढ़ते ही घरेलू बाजार पर तुरंत असर पड़ता है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में ऊर्जा लागत सीधे महंगाई को प्रभावित करती है।
समाधान क्या हो सकता है?
विशेषज्ञ सरकारों को सुझाव दे रहे हैं:
- लक्षित LPG सब्सिडी
- गरीब परिवारों के लिए राहत योजना
- सोलर कुकिंग और बायोगैस बढ़ावा
- स्थानीय स्वच्छ ऊर्जा निवेश
- ऊर्जा आपूर्ति विविधीकरण
भारत के लिए क्या संकेत?
भारत में उज्ज्वला जैसी योजनाओं से स्वच्छ ईंधन पहुंच बढ़ी है, लेकिन यदि वैश्विक कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो गरीब परिवारों पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए सस्ती और स्थिर ऊर्जा नीति अहम होगी।
ऊर्जा संकट सिर्फ पेट्रोल-डीजल की कहानी नहीं है, यह रसोई, स्वास्थ्य और पर्यावरण का भी संकट है। अफ्रीका और दक्षिण एशिया में लोगों का फिर लकड़ी-कोयले पर लौटना बताता है कि स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच अभी भी नाजुक है।
