भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में गुरुवार को दबाव देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई बढ़ने की आशंका के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 2 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 6.94% तक पहुंच गई।
क्या होता है बॉन्ड यील्ड बढ़ना?
जब बॉन्ड की कीमतें गिरती हैं, तब उनकी यील्ड बढ़ती है। इसका मतलब है कि बाजार में निवेशक भविष्य को लेकर चिंतित हैं और ज्यादा रिटर्न की मांग कर रहे हैं। 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड को अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
तेल कीमतों से क्यों बढ़ी चिंता?
ब्रेंट क्रूड में रातोंरात करीब 2% तेजी देखी गई और यह $103 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और व्यापार मार्गों पर रुकावट की खबरों से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इससे भारत जैसे तेल आयातक देशों पर दबाव बन सकता है।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से:
- पेट्रोल-डीजल कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है
- महंगाई दर ऊपर जा सकती है
- रुपये पर असर पड़ सकता है
- ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं
- बॉन्ड बाजार कमजोर रह सकता है
निवेशक किस बात से डर रहे हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार को लग रहा है कि अगर तेल ऊंचा बना रहा, तो RBI को जल्द दर कटौती में सावधानी बरतनी पड़ सकती है। इससे बॉन्ड यील्ड ऊपर रह सकती है। कुछ ट्रेडर्स अब “higher-for-longer” ब्याज दर माहौल की संभावना देख रहे हैं।
शेयर बाजार पर भी असर
बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर इक्विटी बाजार पर भी पड़ता है। जब सुरक्षित निवेश विकल्प बेहतर रिटर्न देने लगते हैं, तो कुछ निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर बॉन्ड में जा सकते हैं। इससे बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
आगे किन चीजों पर नजर?
अब निवेशकों की नजर इन बिंदुओं पर रहेगी:
- कच्चे तेल की कीमतें
- मध्य-पूर्व की स्थिति
- RBI की अगली नीति बैठक
- महंगाई के आंकड़े
- सरकारी बॉन्ड नीलामी
भारतीय बॉन्ड बाजार फिलहाल वैश्विक तेल कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के दबाव में है। 10-वर्षीय यील्ड का बढ़ना बताता है कि निवेशक सतर्क हैं। अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में बाजार पर दबाव जारी रह सकता है।
