भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) ने कहा है कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेगा और चुनिंदा बाजारों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
इस समझौते के तहत भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों को न्यूजीलैंड बाजार में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा। इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और वे बेहतर कीमतों पर अपने उत्पाद बेच सकेंगी। पहले कुछ श्रेणियों पर शुल्क लगने से भारतीय निर्यातकों को नुकसान होता था, लेकिन अब स्थिति बदल जाएगी।
2025 में न्यूजीलैंड ने भारत से खरीदे करोड़ों के टेक्सटाइल उत्पाद
न्यूजीलैंड के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दिसंबर 2025 तक भारत से आयात किए गए “मेड-अप टेक्सटाइल आर्टिकल्स” की कीमत NZ$80.22 मिलियन रही। यह भारत के लिए बड़ा संकेत है कि वहां भारतीय उत्पादों की अच्छी मांग पहले से मौजूद है।
CITI ने बताया क्यों खास है यह डील
CITI चेयरमैन अश्विन चंद्रन ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह समझौता भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए राहत लेकर आया है। इससे एक्सपोर्टर को नए बाजार मिलेंगे और वे वैल्यू-एडेड यानी अधिक मुनाफे वाले उत्पादों पर फोकस कर सकेंगे।
किन सेक्टरों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि न्यूजीलैंड जैसे हाई-इनकम और क्वालिटी-फोकस्ड बाजार में भारत के इन सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है:
- होम टेक्सटाइल
- सस्टेनेबल टेक्सटाइल
- टेक्निकल टेक्सटाइल
- ऊन आधारित हाई-एंड गारमेंट्स
- प्रीमियम फैब्रिक्स
ऊन आयात से भी होगा लाभ
न्यूजीलैंड उच्च गुणवत्ता वाली ऊन का बड़ा निर्यातक है। ऐसे में भारतीय कंपनियां वहां से बेहतर क्वालिटी की ऊन आयात कर प्रीमियम कपड़े तैयार कर सकती हैं और दुनिया भर में एक्सपोर्ट कर सकती हैं।
2030 के लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार
भारत ने 2030 तक टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को $350 बिलियन इंडस्ट्री बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें $100 बिलियन एक्सपोर्ट का लक्ष्य शामिल है। यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट उस लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित हो सकता है।
