वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार US Navy destroyer ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी लागू करते हुए एक ईरानी झंडे वाले जहाज को रोक दिया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब जहाज कथित रूप से अमेरिकी निर्देशों की अनदेखी करते हुए प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था।
रिपोर्ट के मुताबिक यह ऑपरेशन अमेरिकी प्रशासन द्वारा अप्रैल में शुरू की गई समुद्री नाकेबंदी का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ईरान के समुद्री व्यापार और तेल निर्यात पर दबाव बनाना बताया जा रहा है। इस कदम से खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
क्या हुआ समुद्र में?
सूत्रों के अनुसार अमेरिकी युद्धपोत ने ईरानी जहाज को कई बार चेतावनी दी, लेकिन जहाज ने दिशा नहीं बदली। इसके बाद अमेरिकी नौसेना ने उसे रोकने के लिए कार्रवाई की। कुछ रिपोर्ट्स में दावा है कि जहाज की गति रोकने के लिए उसके इंजन सेक्शन को निशाना बनाया गया। बाद में जहाज को नियंत्रण में ले लिया गया।
कौन सा जहाज था?
रिपोर्ट्स में जहाज का नाम Touska बताया गया है, जो ईरानी झंडे वाला मालवाहक जहाज है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह जहाज पहले से प्रतिबंधित सूची में शामिल था और उस पर अवैध गतिविधियों के आरोप भी रहे हैं।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। तेहरान ने इसे समुद्री डकैती, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और उकसावे वाली कार्रवाई बताया है। ईरान ने चेतावनी दी कि वह इस मामले का जवाब देगा।
वैश्विक बाजार पर असर
अमेरिका-ईरान तनाव का असर तेल बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। यदि खाड़ी क्षेत्र में नौवहन बाधित होता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में गिना जाता है।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत के लिए यह खबर अहम है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है। यदि क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है तो:
- कच्चा तेल महंगा हो सकता है
- पेट्रोल-डीजल कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है
- शिपिंग लागत बढ़ सकती है
- रुपया कमजोर हो सकता है
आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत नहीं हुई, तो समुद्री टकराव बढ़ सकता है। इससे वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकते हैं।
US Navy द्वारा ईरानी जहाज रोके जाने की घटना ने साफ कर दिया है कि अमेरिका-ईरान तनाव अब समुद्री मोर्चे पर भी गंभीर रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में दुनिया की नजर खाड़ी क्षेत्र पर बनी रहेगी।
