अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक करेंसी बाजारों में फिर से हलचल पैदा कर दी है। ताजा अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद निवेशकों की उस उम्मीद को झटका लगा है, जिसमें माना जा रहा था कि दोनों देशों के बीच जल्द शांति समझौता हो सकता है। इसी वजह से अमेरिकी डॉलर में मजबूती देखने को मिली है, जबकि एशियाई और यूरोपीय मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी हमलों के बाद डॉलर इंडेक्स और डॉलर फ्यूचर्स में तेजी आई। निवेशकों को अब डर है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ा तो कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है, जिससे वैश्विक महंगाई और आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
ईरान शांति वार्ता पर फिर अनिश्चितता
हाल के दिनों में खबरें आई थीं कि अमेरिका और ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और संघर्षविराम बढ़ाने को लेकर एक प्रारंभिक समझौते के करीब पहुंच रहे हैं।
लेकिन सोमवार को दक्षिणी ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद हालात फिर बदल गए। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी कहा कि समझौते में अभी “कुछ दिन और लग सकते हैं।”
इसके बाद निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा और सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग बढ़ गई।
तेल कीमतों में उछाल से बाजार चिंतित
तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति प्रभावित होती है तो वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बना रहे हैं।
रुपये समेत एशियाई मुद्राओं पर दबाव
डॉलर मजबूत होने से भारतीय रुपया, जापानी येन, चीनी युआन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी एशियाई मुद्राओं में कमजोरी देखी गई।
भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले फिसल गया। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती तेल कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता का असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा है।
निवेशकों की नजर अब अगले कदम पर
विश्लेषकों का कहना है कि बाजार अब पूरी तरह अमेरिका-ईरान वार्ता और मध्य पूर्व की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
अगर शांति समझौता जल्दी नहीं हुआ तो डॉलर और मजबूत हो सकता है, जबकि तेल और महंगाई का दबाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
