केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड Central Board of Secondary Education (CBSE) एक बार फिर अपने नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर विवादों में घिर गया है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, CBSE ने स्कूल प्रिंसिपलों को एक विशेष “मैटेरियल फॉर प्रिंसिपल्स” दस्तावेज भेजा, जिसमें सोशल मीडिया पर OSM सिस्टम का समर्थन करने और छात्रों-अभिभावकों को “घबराने की जरूरत नहीं” बताने जैसी बातें शामिल थीं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दस्तावेज में स्कूलों को इंस्टाग्राम रील्स और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए OSM सिस्टम के फायदे प्रचारित करने के सुझाव दिए गए थे। कई वीडियो और रील्स में एक जैसी भाषा और स्क्रिप्ट दिखाई देने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया।
दरअसल, CBSE का नया ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम 2026 से कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन के लिए लागू किया गया है। इस सिस्टम में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर ऑनलाइन जांचा जाता है। बोर्ड का दावा है कि इससे मैनुअल गलतियां कम होंगी और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
हालांकि, परिणाम जारी होने के बाद कई छात्रों और शिक्षकों ने गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं। छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी अपलोड की गई उत्तर पुस्तिकाएं उनकी लिखावट से मेल नहीं खा रही थीं, जबकि कई शिक्षकों ने स्कैनिंग त्रुटियों, धीमे सिस्टम और मूल्यांकन के दौरान तकनीकी समस्याओं की बात कही।
इस विवाद के बाद शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने स्वीकार किया कि OSM सिस्टम में कुछ विसंगतियां सामने आई हैं और सरकार आवश्यक सुधारात्मक कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र की शिकायत को अनदेखा नहीं किया जाएगा और IIT कानपुर व IIT मद्रास जैसी संस्थाओं की मदद से सिस्टम की समीक्षा की जा रही है।
इसी बीच, विपक्षी नेताओं ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार और CBSE पर सवाल उठाए हैं। Rahul Gandhi ने OSM कॉन्ट्रैक्ट और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर जवाब मांगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन भविष्य की आवश्यकता है, लेकिन इतने बड़े स्तर पर नई तकनीक लागू करने से पहले पर्याप्त परीक्षण, प्रशिक्षण और तकनीकी तैयारी जरूरी थी। फिलहाल CBSE इस विवाद को शांत करने और छात्रों का भरोसा वापस जीतने की कोशिश में जुटा हुआ है।
