देशभर में केमिस्ट हड़ताल: अहमदाबाद समेत गुजरात के 35 हजार मेडिकल स्टोर बंद, ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर सख्ती की मांग

अहमदाबाद। देशभर में अवैध ई-फार्मेसी और ऑनलाइन नशे की दवाओं की बिक्री के खिलाफ दवा व्यापारियों ने बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। ऑल इंडिया केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन (AICDF) के आह्वान पर बुधवार को देशभर के 12 लाख से अधिक मेडिकल स्टोर्स बंद रहे। गुजरात में भी इस बंद का व्यापक असर देखने को मिला, जहां अहमदाबाद के करीब 3500 समेत राज्यभर के लगभग 35 हजार मेडिकल स्टोर्स ने हड़ताल में हिस्सा लिया।

दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के दवाएं बेची जा रही हैं, जिससे लोगों की सेहत और युवाओं का भविष्य दोनों खतरे में पड़ रहे हैं। संगठन ने सरकार से अवैध ई-फार्मेसी पर तत्काल प्रतिबंध लगाने और नशे वाली दवाओं की ऑनलाइन बिक्री रोकने की मांग की है।

ऑनलाइन बिक रही नशे की दवाएं

फेडरेशन ऑफ गुजरात स्टेट केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य जशुभाई पटेल ने कहा कि दवाएं कोई शौक की चीज नहीं होतीं, बल्कि मरीजों की जरूरत होती हैं। इसलिए सही दवा सही मरीज तक सही तरीके से पहुंचे, यह बेहद जरूरी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना किसी वैध प्रिस्क्रिप्शन के कोडीन सिरप, अल्प्राजोलम, ट्रामाडोल, नाइट्राजेपम और डाइजेपाम जैसी नशीली दवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। इससे युवा तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं, जो समाज और देश के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

नकली दवाओं का भी बढ़ा खतरा

दवा व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ऑनलाइन कंपनियां नकली और घटिया दवाओं की सप्लाई कर रही हैं। इससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है। संगठन का कहना है कि इस संबंध में केंद्र सरकार को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से व्यापारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

सरकार से क्या हैं प्रमुख मांगें?

केमिस्ट एसोसिएशन ने केंद्र सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं—

  • अवैध ई-फार्मेसी पर तत्काल रोक लगे
  • ऑनलाइन नशीली और प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री बंद हो
  • नकली दवाओं के कारोबार पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो
  • कोविड काल में जारी कुछ विशेष ऑनलाइन दवा बिक्री संबंधी नोटिफिकेशन वापस लिए जाएं

मरीजों को राहत देने के लिए विशेष व्यवस्था

हालांकि मेडिकल स्टोर्स बंद रहे, लेकिन आपात स्थिति को देखते हुए हर गांव और शहर के प्रत्येक क्षेत्र में कम से कम एक मेडिकल स्टोर खुला रखने की व्यवस्था की गई। ताकि मरीजों को जरूरी दवाओं के लिए परेशानी न हो।

सरकार ने दी राहत की जानकारी

राज्य के खाद्य एवं औषधि नियामक विभाग ने कहा कि लोगों को दवाओं की कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार के अनुसार—

  • सभी अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर्स खुले रहेंगे
  • प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र चालू रहेंगे
  • सिविल अस्पताल, CHC और PHC से जुड़े मेडिकल स्टोर्स भी खुले रहेंगे

सरकार ने नागरिकों से घबराने की बजाय जरूरत के अनुसार दवाएं खरीदने की अपील की है।

ई-फार्मेसी पर बढ़ती बहस

देश में डिजिटल हेल्थ सेवाओं के विस्तार के साथ ई-फार्मेसी का कारोबार तेजी से बढ़ा है। जहां एक ओर इससे लोगों को घर बैठे दवाएं मिल रही हैं, वहीं दूसरी ओर दवा व्यापारियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिना नियंत्रण के यह व्यवस्था स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए मजबूत रेगुलेशन और प्रिस्क्रिप्शन वेरिफिकेशन सिस्टम जरूरी है, ताकि नशे की दवाओं और नकली दवाओं की सप्लाई रोकी जा सके।

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