क्लीन एनर्जी में रिकॉर्ड निवेश के बावजूद धीमा पड़ा ऊर्जा संक्रमण, WEF ने जताई चिंता

अहमदाबाद: दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) की ओर बढ़ रहा ऊर्जा संक्रमण अब अधिक जटिल और अनिश्चित दौर में प्रवेश कर रहा है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में व्यवधान और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण इस परिवर्तन की गति प्रभावित हो रही है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि क्लीन एनर्जी में रिकॉर्ड निवेश होने के बावजूद टिकाऊ, सस्ती और मजबूत ऊर्जा प्रणालियों के निर्माण की रफ्तार धीमी पड़ रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, देश मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के बीच ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसके चलते स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

वैश्विक ऊर्जा संक्रमण लगभग ठहर गया

WEF और एक्सेंचर की साझेदारी में तैयार किए गए Energy Transition Index के अनुसार वैश्विक ऊर्जा संक्रमण लगभग रुक सा गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 में वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में कुल 3.3 ट्रिलियन डॉलर का निवेश हुआ, जिसमें से 2.3 ट्रिलियन डॉलर स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं पर खर्च किए गए। इसके बावजूद ऊर्जा संक्रमण की वास्तविक तैयारी में गिरावट दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार एक दशक से अधिक समय में पहली बार ऊर्जा संक्रमण की तैयारी का स्तर कम हुआ है।

भू-राजनीतिक संकटों ने बढ़ाई चुनौती

रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दुनिया बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों का सामना कर रही है। इसमें दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालिया व्यवधानों का भी उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक इन घटनाओं ने ऊर्जा प्रणालियों की कमजोरियों को उजागर किया है, जो पहले से ही बढ़ती बिजली मांग, सीमित बुनियादी ढांचे और पूंजी तक असमान पहुंच जैसी चुनौतियों से जूझ रही हैं।

विशेष रूप से आयात-निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाएं इन व्यवधानों से सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं।

ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और वहनीयता के बीच संतुलन की चुनौती

WEF का कहना है कि दुनिया के अधिकांश देश तीन प्रमुख लक्ष्यों—ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता (Sustainability) और वहनीयता (Affordability)—के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि वैश्विक स्तर पर गति धीमी हुई है, फिर भी कुछ देशों ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।

नॉर्डिक देशों ने ऊर्जा संक्रमण रैंकिंग में अपना नेतृत्व बरकरार रखा है, जबकि मजबूत नीतिगत समर्थन और नियामकीय सुधारों के कारण सिंगापुर सबसे तेजी से प्रगति करने वाले देशों में शामिल हुआ है।

भारत और चीन ने दिखाई मजबूती

रिपोर्ट के अनुसार चीन ने स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग में रिकॉर्ड स्तर बनाए रखा है।

वहीं भारत ने ऊर्जा संक्रमण की तैयारी के मामले में सबसे मजबूत सुधार दर्ज किया है। यह सुधार नीति ढांचे, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश माहौल में हुए सकारात्मक बदलावों को दर्शाता है।

निवेश में बढ़ती असमानता चिंता का विषय

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक क्लीन एनर्जी निवेश का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा कुछ चुनिंदा देशों में केंद्रित है, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाएं भविष्य में बिजली मांग में अनुमानित 80 प्रतिशत वृद्धि का प्रतिनिधित्व करती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह असंतुलन वैश्विक डीकार्बोनाइजेशन की गति को धीमा कर सकता है और विकसित तथा विकासशील देशों के बीच ऊर्जा असमानता को और बढ़ा सकता है।

रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा संक्रमण के लिए सुलभ और किफायती वित्तपोषण की व्यवस्था भविष्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन सकती है।

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