जज के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट पड़ी भारी! केजरीवाल समेत AAP नेताओं को हाईकोर्ट का अवमानना नोटिस

दिल्ली शराब नीति मामले में कानूनी विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर कथित रूप से न्यायाधीश के खिलाफ अभियान चलाने के आरोप में दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के कई बड़े नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को नोटिस जारी किया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, विनय मिश्रा, दुर्गेश पाठक और सौरभ भारद्वाज को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर न्यायाधीश के खिलाफ पोस्ट की गई सामग्री को सुरक्षित रखने के भी आदेश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

पूरा विवाद दिल्ली आबकारी नीति (Liquor Policy) मामले से जुड़ा हुआ है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब सोशल मीडिया पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर अभियान चलाया गया।

जस्टिस शर्मा उस याचिका पर सुनवाई कर रही थीं जिसमें Central Bureau of Investigation ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सभी 23 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।

जस्टिस शर्मा पर पक्षपात का आरोप

सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं की ओर से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर पक्षपात की आशंका जताई गई। नेताओं ने अदालत से अनुरोध किया कि जस्टिस शर्मा इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लें।

हालांकि, जस्टिस शर्मा ने यह मांग खारिज कर दी और सुनवाई जारी रखने का फैसला किया।

इसके बाद:

  • केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने अदालत को पत्र लिखा
  • सुनवाई का बहिष्कार करने की घोषणा की
  • कहा कि वे न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही वकीलों के माध्यम से पेश होंगे

इसी घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर न्यायाधीश के खिलाफ कथित टिप्पणियां और वीडियो सामने आए, जिसने मामले को और संवेदनशील बना दिया।

हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख

दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुदेजा शामिल हैं, ने मामले को गंभीर मानते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी।

कोर्ट ने:

  • सोशल मीडिया पोस्ट्स और वीडियो को सुरक्षित रखने का आदेश दिया
  • इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड संरक्षित करने को कहा
  • सभी नेताओं से जवाब मांगा

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला न्यायपालिका की गरिमा और अदालत की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है।

ट्रायल कोर्ट के फैसले पर उठा था विवाद

इस पूरे विवाद की शुरुआत 27 फरवरी के उस फैसले से हुई थी जिसमें ट्रायल कोर्ट ने:

  • अरविंद केजरीवाल
  • मनीष सिसोदिया
  • के. कविता

सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दे दी थी।

ट्रायल कोर्ट ने Central Bureau of Investigation की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे।

हालांकि, बाद में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट के कई निष्कर्ष “भ्रामक और त्रुटिपूर्ण” प्रतीत होते हैं। इसके बाद राजनीतिक और कानूनी विवाद तेज हो गया।

राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल

AAP नेताओं के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी होने के बाद राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी को घेर रहे हैं, जबकि पार्टी समर्थक इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • न्यायपालिका पर सार्वजनिक टिप्पणी संवेदनशील मुद्दा है
  • सोशल मीडिया अभियानों का कानूनी प्रभाव बढ़ता जा रहा है
  • अदालतें डिजिटल कंटेंट को लेकर अब ज्यादा सख्त रुख अपना रही हैं

क्या होती है Criminal Contempt?

भारतीय कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति:

  • अदालत की गरिमा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे
  • न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करे
  • न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करे

तो उसे आपराधिक अवमानना माना जा सकता है।

ऐसे मामलों में अदालत जुर्माना, सजा या अन्य कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *