नई दिल्ली/मंगलुरु: देश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम ने एक और बड़ा शिकार बना लिया। कर्नाटक के मंगलुरु में 61 वर्षीय व्यक्ति से साइबर ठगों ने खुद को सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर ₹2.07 करोड़ की ठगी कर ली। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी कितनी खतरनाक और संगठित हो चुकी है।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित व्यक्ति को एक कॉल आया जिसमें कॉलर ने खुद को “National Data Protection Centre” का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि पीड़ित के दस्तावेजों का इस्तेमाल मुंबई में अवैध SIM कार्ड लेने के लिए हुआ है, जिसका उपयोग अपराधों में किया गया। इसके बाद पीड़ित को डराया गया कि उसके खिलाफ कई FIR दर्ज हैं।
कैसे हुआ डिजिटल अरेस्ट?
ठगों ने इसके बाद खुद को NIA और ED अधिकारी बताकर WhatsApp वीडियो कॉल किए। उन्होंने नकली जांच, गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। पीड़ित को लगातार निगरानी में रखा गया और कई दिनों तक मानसिक दबाव बनाया गया।
डर के माहौल में व्यक्ति ने 7 अप्रैल से 18 अप्रैल के बीच कई किस्तों में कुल ₹2,07,04,600 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में उसे एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुका है।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
यह ऐसा साइबर फ्रॉड है जिसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, ED, RBI, कूरियर कंपनी या सरकारी अधिकारी बताकर व्यक्ति को डराते हैं कि वह किसी अपराध में शामिल है। फिर कहते हैं कि उसे “डिजिटल अरेस्ट” किया गया है और मामला बंद कराने के लिए पैसे ट्रांसफर करने होंगे।
कैसे बचें इस स्कैम से?
विशेषज्ञों के अनुसार इन बातों का ध्यान रखें:
- कोई सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती
- फोन पर FIR, warrant या arrest order पर भरोसा न करें
- OTP, बैंक डिटेल्स, UPI PIN साझा न करें
- डराने पर तुरंत कॉल काटें
- परिवार या पुलिस से बात करें
- राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें
देशभर में बढ़ रहे मामले
हाल ही में मुंबई, अहमदाबाद, कोलकाता और दिल्ली में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां बुजुर्गों और पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाया गया।
मंगलुरु का ₹2 करोड़ डिजिटल अरेस्ट स्कैम बताता है कि साइबर अपराधी अब डर और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। कोई भी एजेंसी फोन पर पैसे नहीं मांगती—ऐसी कॉल आए तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
