पेट्रोल-डीजल और महंगाई पर IMF की बड़ी चेतावनी, रुपये में गिरावट से बढ़ेगा आर्थिक दबाव

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में बने संकट के बीच भारत की अर्थव्यवस्था पर महंगाई का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने भारत के लिए “ट्रिपल वॉर्निंग” जारी करते हुए कहा है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर भारतीय जनता की जेब पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज उछाल, रुपये की कमजोरी और महंगाई का दबाव आने वाले महीनों में और गंभीर हो सकता है।

अमेरिका-ईरान तनाव से भारत पर बढ़ेगा असर

गीता गोपीनाथ के अनुसार भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर मिडल ईस्ट पर निर्भर है। ऐसे में यदि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में संकट लंबा खिंचता है तो भारत को सिर्फ महंगे तेल का ही नहीं बल्कि सप्लाई संकट का भी सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जून तक हालात नहीं सुधरे तो भारत की आयात लागत और विदेशी मुद्रा पर भारी दबाव बनेगा।

भारत के लिए IMF की 3 बड़ी चेतावनियां

1. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। यदि ऐसा हुआ तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। हाल ही में सरकार ने दो चरणों में ईंधन के दाम बढ़ाए हैं, लेकिन आने वाले समय में और वृद्धि संभव मानी जा रही है।

2. महंगाई और आर्थिक विकास पर दबाव

ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स और उत्पादन लागत बढ़ेगी। इसका असर खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक पर पड़ेगा। इससे खुदरा महंगाई दर में तेज उछाल आने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे आर्थिक विकास की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है।

3. डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी

फरवरी में जहां डॉलर के मुकाबले रुपया 91 के स्तर पर था, वहीं अब यह 97 के करीब पहुंच चुका है। गीता गोपीनाथ ने कहा कि RBI को रुपये को 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर से बचाने की बजाय रोजगार और उत्पादन बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

पेट्रोल-डीजल में ₹7 से ₹9 प्रति लीटर तक बढ़ोतरी संभव

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के कई देशों ने पहले ही ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि कर दी है। भारत में अभी तक सीमित बढ़ोतरी की गई है, लेकिन तेल कंपनियों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए अगले कुछ हफ्तों में पेट्रोल और डीजल के दाम ₹7 से ₹9 प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं। हालांकि यह बढ़ोतरी एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से की जा सकती है।

सरकार के सामने सीमित विकल्प

सरकार यदि जनता और उद्योगों को राहत देने के लिए टैक्स में कटौती या सब्सिडी बढ़ाती है तो राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है। पहले ही सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती के कारण राजस्व नुकसान झेल रही है। ऐसे में सरकार के पास विकल्प सीमित दिखाई दे रहे हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत

हालांकि गीता गोपीनाथ ने यह भी कहा कि भारत की आंतरिक आर्थिक स्थिति अभी मजबूत है और देश गंभीर मंदी की तरफ नहीं बढ़ रहा। उन्होंने कहा कि भारत के घरेलू सेक्टर और उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत आधार पर खड़े हैं, जिससे बड़े आर्थिक संकट की संभावना कम है।

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