अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों में लगातार हो रही छंटनी ने हजारों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियों में नौकरी कटौती के बीच H-1B वीज़ा पर काम कर रहे भारतीय कर्मचारियों के सामने अमेरिका में बने रहने का संकट गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते इमिग्रेशन नियम और कमजोर नौकरी बाजार भारतीय टेक वर्कर्स के लिए आने वाले समय को और मुश्किल बना सकते हैं।
H-1B वीज़ा पर सबसे ज्यादा दबाव
अमेरिका में नौकरी जाने के बाद H-1B वीज़ा धारकों को केवल 60 दिनों का समय मिलता है, जिसमें उन्हें नई नौकरी खोजनी होती है या फिर अपना वीज़ा स्टेटस बदलना पड़ता है। यदि ऐसा नहीं हो पाता तो उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। हालिया छंटनी के बाद हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स इसी अनिश्चितता से गुजर रहे हैं।
Meta, Amazon और बड़ी टेक कंपनियों में कटौती
रिपोर्ट्स के मुताबिक Meta, Amazon और अन्य टेक कंपनियों ने लागत कम करने और AI आधारित ऑटोमेशन बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की है। इसका सबसे अधिक असर विदेशी कर्मचारियों, खासकर भारतीय आईटी इंजीनियर्स पर पड़ रहा है, क्योंकि अमेरिका के टेक सेक्टर में भारतीयों की बड़ी हिस्सेदारी है।
AI और ऑटोमेशन से बढ़ी चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कंपनियां अब कम कर्मचारियों के साथ अधिक काम करना चाहती हैं। इससे पारंपरिक सॉफ्टवेयर और सपोर्ट रोल्स में नौकरियों की संख्या घट रही है। आने वाले वर्षों में AI स्किल्स रखने वाले कर्मचारियों की मांग बढ़ेगी, जबकि सामान्य टेक रोल्स पर दबाव बना रहेगा।
भारतीय प्रोफेशनल्स के सामने क्या विकल्प?
कई भारतीय कर्मचारी अब कनाडा, यूरोप और भारत लौटने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। कुछ लोग B-2 विज़िटर वीज़ा या दूसरे इमिग्रेशन विकल्पों के जरिए अमेरिका में समय बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण नई नौकरी हासिल करना आसान नहीं रह गया है।
अमेरिकी इमिग्रेशन नीति पर भी बहस तेज
H-1B वीज़ा को लेकर अमेरिका में लंबे समय से बहस चल रही है। आलोचकों का आरोप है कि कंपनियां कम लागत पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि टेक इंडस्ट्री को कुशल पेशेवरों की जरूरत है। बदलते राजनीतिक माहौल में H-1B नियमों को और सख्त किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है।
भारतीय टेक सेक्टर पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार यदि अमेरिका में छंटनी का दौर लंबा चलता है तो इसका असर भारतीय आईटी सेक्टर पर भी दिखाई दे सकता है। अमेरिका भारतीय आईटी कंपनियों का सबसे बड़ा बाजार है और वहां की मांग में गिरावट भारतीय कंपनियों की ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है।
