तेल संकट के बीच भारत में सबसे कम बढ़ीं पेट्रोल-डीजल कीमतें, सरकार ने गिनाए बड़े कारण

वैश्विक तेल संकट और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सीमित बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत उन देशों में शामिल है जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में सबसे कम वृद्धि हुई है।

78 दिन तक स्थिर रहीं कीमतें

सरकार के मुताबिक, 28 फरवरी 2026 को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। इसके बावजूद भारत में तेल कंपनियों ने 78 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया।

इसके बाद ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 15, 19, 23 और 25 मई को चार चरणों में कीमतों में संशोधन किया। इस दौरान पेट्रोल की कीमत में कुल 7.35 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 7.53 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। यानी कुल वृद्धि लगभग 7.5 प्रतिशत रही।

राष्ट्रीय राजधानी New Delhi में पेट्रोल अब 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।

कई देशों में 50% से 90% तक बढ़ीं कीमतें

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इसी अवधि में कई देशों में ईंधन कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया।

  • Myanmar में पेट्रोल की कीमत लगभग 90 प्रतिशत तक बढ़ गई।
  • Pakistan और United Arab Emirates में कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई।
  • वहीं United States और कई यूरोपीय देशों में भी 20 प्रतिशत से ज्यादा उछाल देखा गया।

वैश्विक स्तर पर पेट्रोल की औसत कीमत लगभग 130 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि कई यूरोपीय देशों में यह 180 रुपये प्रति लीटर के पार चली गई है। इसके मुकाबले भारत में ईंधन की कीमतें गैर-सब्सिडी वाली अर्थव्यवस्थाओं में अभी भी अपेक्षाकृत कम मानी जा रही हैं।

टैक्स कटौती से मिला राहत का फायदा

सरकार का कहना है कि पिछले चार वर्षों में केंद्र ने कई बार ईंधन पर टैक्स घटाए हैं। हाल ही में 27 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी।

इन कदमों की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का पूरा बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया।

राज्यों के VAT से बढ़ा अंतर

हालांकि अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। इसका मुख्य कारण राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला वैट (VAT) बताया गया है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक विपक्ष शासित राज्यों जैसे Telangana और Kerala में पेट्रोल की कीमत 114 रुपये प्रति लीटर से ऊपर पहुंच चुकी है।

वहीं BJP शासित राज्यों जैसे Gujarat, Uttar Pradesh और Haryana में कीमतें लगभग 102 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई हैं।

डीजल की कीमतों में भी यही अंतर देखने को मिल रहा है। कम VAT वाले राज्यों में डीजल 90 रुपये प्रति लीटर से नीचे है, जबकि अधिक टैक्स वाले राज्यों में यह 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर पहुंच चुका है।

सरकार ने उठाए कई वित्तीय कदम

संकट के दौरान सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई वित्तीय उपाय किए। इसमें स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में कटौती और एक्सपोर्ट लेवी लागू करना शामिल था।

सरकार का कहना है कि इस अवधि में नुकसान का बड़ा हिस्सा सरकारी खजाने और तेल कंपनियों ने खुद वहन किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध समेत पिछले वैश्विक संकटों के दौरान भी भारत ने ईंधन कीमतों को अपेक्षाकृत स्थिर रखने की रणनीति अपनाई थी और इस बार भी उसी मॉडल पर काम किया गया।

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