हाल के वर्षों में एंट्री-लेवल और फ्रेशर उम्मीदवारों के लिए नौकरी पाना लगातार कठिन होता जा रहा है। अब तक माना जा रहा था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स जूनियर कर्मचारियों के काम को तेजी से ऑटोमेट कर रहे हैं, जिसके कारण कंपनियां नए कर्मचारियों की भर्ती कम कर रही हैं। लेकिन एक नई रिसर्च ने इस धारणा को चुनौती देते हुए एक अलग कारण सामने रखा है।
रिपोर्ट के अनुसार, जूनियर कर्मचारियों की कमजोर भर्ती के पीछे AI से ज्यादा ‘वर्क फ्रॉम होम’ या रिमोट वर्क मॉडल जिम्मेदार हो सकता है। शोधकर्ताओं पीटर जॉन लैम्बर्ट और यानिक शिंडलर द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि जिन नौकरियों में रिमोट वर्क की संभावना अधिक है, वहां एंट्री-लेवल भर्ती में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है।
क्यों घट रही है फ्रेशर्स की भर्ती?
विशेषज्ञों का मानना है कि नए कर्मचारियों को अनुभवी कर्मचारियों की तुलना में अधिक प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और निगरानी की आवश्यकता होती है। ऑफिस में काम करने के दौरान जूनियर कर्मचारी अपने वरिष्ठ सहयोगियों को देखकर, उनसे बातचीत करके और टीम के साथ काम करते हुए कई महत्वपूर्ण कौशल सीखते हैं।
लेकिन जब कर्मचारी घर से काम करते हैं, तो यह सीखने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। कंपनियों को नए कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने में अधिक समय और संसाधन खर्च करने पड़ते हैं। यही कारण है कि कई संस्थान अनुभवी पेशेवरों को प्राथमिकता दे रहे हैं और फ्रेशर्स की भर्ती सीमित कर रहे हैं।
AI या रिमोट वर्क – असली वजह क्या है?
अध्ययन में करोड़ों जॉब पोस्टिंग और भर्ती आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शुरुआती तौर पर ऐसा लगा कि AI से प्रभावित नौकरियों में जूनियर हायरिंग कम हुई है। लेकिन जब शोधकर्ताओं ने रिमोट वर्क के प्रभाव को भी शामिल किया, तो AI और कमजोर भर्ती के बीच का संबंध काफी हद तक खत्म हो गया।
शोध में पाया गया कि कई ऐसी नौकरियां, जिन पर AI का प्रभाव अपेक्षाकृत कम है लेकिन जिन्हें रिमोट तरीके से किया जा सकता है, वहां भी फ्रेशर्स की भर्ती कमजोर रही। वहीं कुछ ऐसी भूमिकाएं जिनमें AI का प्रभाव अधिक माना जाता है लेकिन ऑफिस उपस्थिति जरूरी है, वहां भर्ती अपेक्षाकृत स्थिर बनी रही।
टेक सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर
सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डेटा एनालिटिक्स, कंसल्टिंग और अन्य व्हाइट-कॉलर नौकरियां रिमोट वर्क के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं। यही कारण है कि इन क्षेत्रों में फ्रेशर्स के लिए अवसर अपेक्षाकृत तेजी से घटे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि कार्य संस्कृति में आए बदलाव का परिणाम है। कंपनियां अब ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं जो कम निगरानी में काम कर सकें और तुरंत उत्पादक बन सकें।
क्या AI का कोई प्रभाव नहीं है?
रिपोर्ट यह नहीं कहती कि AI का नौकरी बाजार पर कोई असर नहीं है। शोधकर्ताओं के अनुसार AI भविष्य में कई भूमिकाओं को प्रभावित कर सकता है, लेकिन वर्तमान में एंट्री-लेवल भर्ती में आई गिरावट का बड़ा कारण रिमोट वर्क मॉडल दिखाई देता है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि रिमोट वातावरण में काम करने वाले कर्मचारियों के कार्यों को ऑटोमेट करना कंपनियों के लिए अपेक्षाकृत आसान लगता है, जिससे भविष्य में AI का प्रभाव और बढ़ सकता है।
हाइब्रिड मॉडल बन सकता है समाधान
अध्ययन के अनुसार पूरी तरह ऑफिस लौटना व्यावहारिक समाधान नहीं है, लेकिन हाइब्रिड वर्क मॉडल बेहतर संतुलन प्रदान कर सकता है। इससे कर्मचारियों को लचीलापन भी मिलेगा और जूनियर कर्मचारियों को सीखने, नेटवर्किंग और करियर विकास के अवसर भी मिलेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में कंपनियों को फ्रेशर्स के लिए बेहतर प्रशिक्षण कार्यक्रम, मेंटरशिप और हाइब्रिड कार्य व्यवस्था विकसित करनी होगी ताकि शुरुआती करियर वाले कर्मचारियों के लिए अवसर बढ़ाए जा सकें।
