एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू नहीं होने से घरेलू उद्योग को बड़ा नुकसान, विदेशी मुद्रा बचत का मौका भी गंवाया

भारत में घरेलू उद्योगों को सस्ते आयातित सामान से हो रहे नुकसान को रोकने के लिए सुझाई गई एंटी-डंपिंग ड्यूटी की कई सिफारिशें अब तक लागू नहीं हो पाई हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इन लंबित सिफारिशों के कारण देश के घरेलू उद्योगों को हर साल करीब ₹11,938 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाए तो भारत करीब ₹28,540 करोड़ यानी लगभग 3 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा सकता है।

DGTR की 56 सिफारिशें अब भी लंबित

रिपोर्ट में बताया गया है कि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) द्वारा एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने के लिए की गई 56 सिफारिशों पर वित्त मंत्रालय ने अभी तक अमल नहीं किया है। DGTR विभिन्न उद्योगों की शिकायतों की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को भेजता है, जिसके आधार पर ड्यूटी लागू की जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन सिफारिशों को लागू करने से घरेलू उद्योग आयातित उत्पादों पर निर्भरता कम कर सकते हैं और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर

यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई 728.49 अरब डॉलर से घटकर करीब 688 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। ऐसे में आयात कम करके विदेशी मुद्रा बचाना सरकार के लिए अहम हो सकता है।

घरेलू उद्योगों को मिल सकता है बड़ा सहारा

रिपोर्ट के मुताबिक यदि एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू की जाती है तो घरेलू उद्योग बाजार की मांग पूरी करने में सक्षम होंगे और सस्ते विदेशी उत्पादों की वजह से होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा।

विशेष रूप से स्टील, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को इससे बड़ा लाभ मिल सकता है।

पहले 99% सिफारिशों पर होता था अमल

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2020 तक DGTR की करीब 99 प्रतिशत सिफारिशों को लागू किया जाता था। लेकिन हाल के वर्षों में कई मामलों में कार्रवाई लंबित रहने लगी है, जबकि सस्ते आयातित सामान की वजह से घरेलू उद्योगों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

21 उत्पादों का किया गया अध्ययन

सेंटर फॉर डोमेस्टिक इकोनॉमी पॉलिसी रिसर्च द्वारा WTO अध्ययन के तहत तैयार रिपोर्ट में 21 ऐसे उत्पादों का विश्लेषण किया गया, जिनके लिए DGTR ने एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश की थी, लेकिन अभी तक उन पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इन सिफारिशों पर जल्द निर्णय लेती है तो इससे घरेलू उद्योगों को राहत मिलेगी, रोजगार बढ़ेगा और विदेशी मुद्रा की भी बड़ी बचत होगी।

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