अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर पेंटागन ने क्यूबा पर संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारियां तेज कर दी हैं। बताया जा रहा है कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई, जिसके बाद अब सैन्य विकल्पों पर गंभीर विचार किया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने कैरेबियन सागर में भारी सैन्य तैनाती शुरू कर दी है। अमेरिकी नौसेना का अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर ‘USS Nimitz’ स्ट्राइक ग्रुप, जिसमें गाइडेड मिसाइल सिस्टम और फाइटर जेट्स शामिल हैं, पहले ही कैरेबियन क्षेत्र में पहुंच चुका है। इसके अलावा अमेरिकी ड्रोन और जासूसी विमान लगातार क्यूबा की सीमाओं के आसपास निगरानी कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि अमेरिका संभावित ऑपरेशन के तहत क्यूबा की शीर्ष नेतृत्व व्यवस्था को निशाना बना सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ अपनाई गई रणनीति जैसी कार्रवाई यहां भी देखने को मिल सकती है। इसमें सीमित एयरस्ट्राइक, मिसाइल हमले या शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में कहा कि अमेरिका के तट से केवल 90 मील दूर एक अस्थिर और विफल राज्य होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 2500 मरीन सैनिकों को लेकर जाने वाला USS Kearsarge युद्धपोत भी तैयार स्थिति में रखा गया है। वहीं अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो अमेरिका के संभावित निशाने पर हो सकते हैं।
हालांकि लगातार चल रहे वैश्विक सैन्य अभियानों के कारण अमेरिकी नौसेना पर दबाव भी बढ़ रहा है। कई युद्धपोत सामान्य अवधि से अधिक समय तक समुद्र में तैनात हैं। इसके बावजूद अमेरिका ने 50 साल पुराने USS Nimitz का कार्यकाल बढ़ाकर 2027 तक कर दिया है।
अब पूरी दुनिया की नजर व्हाइट हाउस पर टिकी हुई है कि क्या अमेरिका वास्तव में क्यूबा के खिलाफ कोई बड़ा सैन्य कदम उठाएगा या फिर कूटनीतिक रास्ता अपनाया जाएगा।
