क्या भारत में आएंगी प्लास्टिक की नोटें? RBI कर रहा बड़ा प्लान, जानिए फायदे और खासियत

भारत में डिजिटल पेमेंट और UPI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद नकदी की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब देश में प्लास्टिक यानी पॉलीमर बैंकनोट्स (Polymer Banknotes) लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। हाल ही में पटना और मुंबई में आयोजित RBI की सेंट्रल बोर्ड बैठक में इस विषय पर गंभीर चर्चा हुई है और जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

RBI प्लास्टिक नोटों पर क्यों कर रहा विचार?

देश में नकदी का इस्तेमाल बढ़ने से RBI पर नोट छापने और उन्हें संभालने का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में बैंक नोटों की छपाई का खर्च बढ़कर 6,372.8 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 5,101.4 करोड़ रुपये था।

मई 2026 तक देश में चलन में मौजूद कुल नकदी 42.86 ट्रिलियन रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो सालाना आधार पर 11.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। वहीं केवल एक साल में करीब 23.8 अरब गंदी और फटी हुई नोटों को बाजार से वापस लेना पड़ा, जिनमें 500 रुपये की नोटों की संख्या सबसे अधिक थी।

पॉलीमर नोटों के बड़े फायदे

पारंपरिक कागज की नोटों की तुलना में पॉलीमर नोट अधिक टिकाऊ और सुरक्षित मानी जाती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्लास्टिक नोटें सामान्य नोटों की तुलना में 2.5 से 4 गुना ज्यादा समय तक चलती हैं और आसानी से फटती नहीं हैं।

ये नोट विशेष प्रकार की बाय-एक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म से बनाई जाती हैं, जिससे इन पर पानी, नमी, गंदगी और बैक्टीरिया का असर नहीं होता। साथ ही इनमें आधुनिक सिक्योरिटी फीचर्स और विशेष स्याही का उपयोग किया जाता है, जिससे नकली नोट बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

हालांकि प्लास्टिक नोट छापने की शुरुआती लागत अधिक होती है, लेकिन लंबे समय तक उपयोग होने के कारण सरकार को लंबे समय में हजारों करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।

भारत में पहले भी हो चुका है प्रयास

RBI ने अक्टूबर 2009 में 10 रुपये की एक अरब प्लास्टिक नोटें जारी करने के लिए वैश्विक टेंडर जारी किया था। इसके बाद 2015-16 में मैसूर, शिमला, जयपुर, कोच्चि और भुवनेश्वर जैसे अलग-अलग मौसम वाले शहरों में इन नोटों का परीक्षण करने की योजना बनाई गई थी।

लेकिन उस समय तकनीकी समस्याओं और ATM सिस्टम की सीमाओं के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब RBI अधिकारियों का मानना है कि देश का बैंकिंग इकोसिस्टम और ATM ऑथेंटिकेशन सिस्टम काफी आधुनिक हो चुका है, इसलिए इस बार पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने की संभावना अधिक है।

दुनिया के कई देशों में पहले से चल रही हैं प्लास्टिक नोटें

दुनिया में सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में पॉलीमर नोटें शुरू की थीं और 1996 तक पूरी तरह प्लास्टिक करेंसी पर शिफ्ट हो गया था। आज ऑस्ट्रेलिया के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड, वियतनाम, मालदीव, रोमानिया और ब्रुनेई जैसे कई देश सफलतापूर्वक प्लास्टिक करेंसी का उपयोग कर रहे हैं।

अब सवाल यह है कि क्या भारत भी जल्द ही पूरी तरह आधुनिक और टिकाऊ प्लास्टिक करेंसी की ओर कदम बढ़ाएगा? आने वाले समय में RBI का फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।

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