भारत और दुनिया के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। अमेरिका-ईरान और इज़रायल के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद यह रणनीतिक समुद्री मार्ग अत्यंत संवेदनशील और जोखिमपूर्ण हो गया है। हालांकि 9 अप्रैल को युद्धविराम लागू हो चुका है, लेकिन इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है।
ओमान और ईरान के बीच स्थित हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा असर डाल सकती है।
हॉर्मुज़ क्षेत्र में भारत के 13 जहाज अभी भी फंसे
शिपिंग निदेशक ओपेश कुमार शर्मा के अनुसार, वर्तमान में हॉर्मुज़ क्षेत्र में भारत के 13 जहाज फंसे हुए हैं। केंद्र सरकार इन जहाजों और उनके चालक दल को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
फंसे हुए भारतीय जहाजों में शामिल हैं:
- 1 एलपीजी (LPG) टैंकर
- 5 कच्चे तेल (Crude Oil) टैंकर
- 1 केमिकल टैंकर
- 3 कंटेनर जहाज
- 2 बल्क कैरियर
- 1 ड्रेजर
सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इन सभी जहाजों को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित मार्ग प्रदान करना है।
क्या है भारत सरकार की ‘सीक्रेट स्ट्रैटेजी’?
जब अधिकारियों से पूछा गया कि भारत ईरान के साथ किस प्रकार समन्वय कर रहा है, तो उन्होंने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार एक विशेष गोपनीय रणनीति के तहत अपने जहाजों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित कर रही है।
इस पूरे अभियान की निगरानी विदेश मंत्रालय (MEA) कर रहा है। सुरक्षा कारणों से अभियान के संचालन संबंधी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
भारतीय रणनीति का दिखने लगा असर
भारत की इस रणनीति के सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं। हाल ही में लगभग 2.70 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आ रहा भारतीय टैंकर ‘निसोस केरोस’ 25-26 मई की रात सफलतापूर्वक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुका है।
यह जहाज 3 जून 2026 तक विशाखापत्तनम पहुंचने की उम्मीद है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक 14 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से हॉर्मुज़ पार कर भारत पहुंच चुके हैं, जबकि 11 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं।
पब्लिक शिप ट्रैकिंग डेटा पर सरकार की प्रतिक्रिया
ऑनलाइन उपलब्ध सार्वजनिक शिप ट्रैकिंग डेटा को लेकर सुरक्षा चिंताओं के सवाल पर अधिकारियों ने कहा कि यह डेटा विभिन्न व्यावसायिक प्लेटफॉर्म और ऐप्स के माध्यम से उपलब्ध होता है, जिनकी सदस्यता कोई भी ले सकता है।
हालांकि इस डेटा का उपयोग किस उद्देश्य से किया जाएगा, यह उपयोगकर्ता की मंशा पर निर्भर करता है। वर्तमान स्थिति में यही ट्रैकिंग सिस्टम भारतीय अधिकारियों को जहाजों की स्थिति पर नजर रखने में मदद कर रहा है।
जोखिम के बावजूद जारी है भारत का समुद्री व्यापार
28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा किए गए हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। भौगोलिक स्थिति के कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान का महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है।
इसी वजह से दुनिया की कई प्रमुख शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग का उपयोग अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसके बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और व्यापारिक गतिविधियों को जारी रखने के लिए इस समुद्री मार्ग का उपयोग जारी रखा है।
अब तक ‘शिवालिक’, ‘नंदा देवी’, ‘जग लाडकी’, ‘पाइन गैस’, ‘जग वसंत’, ‘बीडब्ल्यू टायर’, ‘बीडब्ल्यू एल्म’ और ‘ग्रीन सान्वी’ जैसे भारतीय जहाज इस चुनौतीपूर्ण मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं।
