भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की तेज़ी से बढ़ती मांग के कारण डेटा सेंटर सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। नए डेटा सेंटर बनने के बावजूद देश में उपलब्ध स्पेस तेजी से भर रहा है और Vacancy Rate लगातार घट रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा डेटा सेंटर मार्केट बन चुका है।
कुशमैन एंड वेकफील्ड की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के अंत तक भारत में डेटा सेंटर Vacancy Rate घटकर 12.9 प्रतिशत रह गया। AI आधारित वर्कलोड, Hyperscale Cloud कंपनियों और Enterprise Digitisation की मांग इतनी तेज़ है कि नई सप्लाई बाजार में आने से पहले ही प्री-लीज़ हो रही है।
मुंबई बना सबसे बड़ा Data Centre Hub
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुंबई देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर मार्केट बना हुआ है और 2026 के अंत तक यहां Operational Capacity 1 गीगावॉट से अधिक हो सकती है। वहीं हैदराबाद, चेन्नई, पुणे और दिल्ली-NCR जैसे शहर भी तेजी से बड़े डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में उभर रहे हैं।
हैदराबाद को एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सबसे तेज़ी से उभरता सेकेंडरी डेटा सेंटर मार्केट बताया गया है। यहां बड़ी टेक और क्लाउड कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रही हैं।
AI Boom ने बढ़ाई Infrastructure की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार AI तकनीक की बढ़ती लोकप्रियता ने डेटा सेंटर इंडस्ट्री को नई रफ्तार दी है। पारंपरिक डेटा सेंटर अब AI वर्कलोड संभालने के लिए पर्याप्त नहीं माने जा रहे, क्योंकि AI सर्वर को कई गुना अधिक बिजली और उन्नत Cooling System की आवश्यकता होती है।
KPMG की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का डेटा सेंटर उद्योग 2033 तक लगभग 45.69 अरब डॉलर के राजस्व तक पहुंच सकता है। AI, Cloud Adoption और Data Localisation Policies इस सेक्टर की ग्रोथ को आगे बढ़ा रही हैं।
3.1 GW की नई Pipeline तैयार
भारत में इस समय करीब 3.1 GW डेटा सेंटर क्षमता निर्माणाधीन या योजना चरण में है। वहीं 10.5 GW से अधिक अतिरिक्त क्षमता Land Acquisition और Planning Stage में बताई गई है। इससे स्पष्ट है कि निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर में लगातार बढ़ रहा है।
चुनौतियां भी बढ़ रहीं
हालांकि, तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर सेक्टर के सामने बिजली, जमीन और पानी की उपलब्धता जैसी बड़ी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। कई विशेषज्ञों और सोशल मीडिया चर्चाओं में पर्यावरणीय दबाव और बिजली खपत को लेकर चिंता जताई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर सिर्फ टेक्नोलॉजी सेक्टर नहीं बल्कि रियल एस्टेट, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री के लिए भी बड़ा अवसर बनेंगे।
