रुपया 3.5 साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट पर, डॉलर के मुकाबले दबाव बढ़ा

नई दिल्ली: भारतीय मुद्रा रुपया (INR) इस सप्ताह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले साढ़े तीन साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज करते हुए कमजोर हुआ है। शुक्रवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ रुपया बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव इस गिरावट के मुख्य कारण रहे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रुपया सप्ताह के अंत में लगभग 94.25 प्रति डॉलर के आसपास बंद हुआ और पूरे सप्ताह में करीब 1.4% की गिरावट दर्ज की। यह सितंबर 2022 के बाद रुपये की सबसे खराब साप्ताहिक कमजोरी मानी जा रही है।

क्यों गिर रहा है रुपया?

रुपये पर दबाव बढ़ने के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं:

  • कच्चे तेल की कीमतों में उछाल – भारत तेल आयात पर निर्भर है, इसलिए महंगा तेल डॉलर की मांग बढ़ाता है।
  • विदेशी निवेशकों की बिकवाली – विदेशी फंड्स के बाहर जाने से रुपये पर दबाव आता है।
  • वैश्विक तनाव – मध्य पूर्व से जुड़ी अनिश्चितता से निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर जाते हैं।
  • मजबूत डॉलर इंडेक्स – डॉलर मजबूत होने पर उभरते बाजारों की मुद्राएं कमजोर पड़ती हैं।

शेयर बाजार पर भी असर

रुपये की कमजोरी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। इस सप्ताह Sensex और Nifty 50 दोनों में गिरावट दर्ज की गई। महंगे तेल और कमजोर मुद्रा से कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

रुपया कमजोर होने का असर सीधे आम लोगों पर पड़ सकता है:

  • पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं
  • आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स महंगे हो सकते हैं
  • विदेश यात्रा खर्च बढ़ सकता है
  • विदेश में पढ़ाई का खर्च बढ़ सकता है
  • महंगाई पर दबाव बन सकता है

RBI क्या कर सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गिरावट तेज़ बनी रहती है तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। RBI डॉलर बेचकर रुपये को सहारा देने की कोशिश कर सकता है। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में हाल ही में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है, जिससे RBI के पास विकल्प मौजूद हैं।

आगे क्या रहेगा नजरिया?

अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं और वैश्विक तनाव जारी रहता है, तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि घरेलू आर्थिक मजबूती और RBI की नीति समर्थन दे सकती है।

भारतीय रुपया इस समय वैश्विक चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। आने वाले दिनों में तेल कीमतें, विदेशी निवेश प्रवाह और RBI के कदम तय करेंगे कि रुपया संभलेगा या दबाव में रहेगा।

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