भारत पर ट्रंप की टिप्पणी पर ईरान का तंज, कहा- बकवास बंद करो और भारत आकर देखो

नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत विरोधी टिप्पणी पर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ट्रंप द्वारा भारत और चीन को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद भारत स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि “बकवास बंद करो और भारत आकर देखो।” इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छिड़ गई है।

क्या कहा था ट्रंप ने?

रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप ने एक पोस्ट में भारत और चीन जैसे देशों को लेकर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। यह टिप्पणी अमेरिका की इमिग्रेशन नीति और प्रवासियों पर चर्चा के दौरान सामने आई, जिसमें भारत को निशाना बनाया गया। ट्रंप के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भारी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

ईरान ने कैसे दिया जवाब?

हैदराबाद स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से ट्रंप के बयान पर तंज कसते हुए कहा गया कि भारत और चीन सभ्यता की जन्मभूमि हैं। साथ ही कहा गया कि असली समस्या उन देशों में है जो युद्ध और नफरत फैलाते हैं। ईरानी पक्ष ने ट्रंप की टिप्पणी को नस्लवादी और अपमानजनक बताया।

भारत की छवि का बचाव

ईरानी प्रतिक्रिया में भारत की सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन सभ्यता और वैश्विक योगदान का उल्लेख किया गया। संदेश साफ था कि भारत जैसे देश को अपमानित करना तथ्यों और इतिहास दोनों के खिलाफ है। ईरान के इस रुख को सोशल मीडिया पर काफी समर्थन मिला।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

ट्रंप के बयान और ईरान के जवाब के बाद सोशल मीडिया पर #India, #Trump और #Iran जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई यूजर्स ने भारत के समर्थन में प्रतिक्रिया दी, जबकि कुछ लोगों ने ट्रंप की बयानबाजी को चुनावी राजनीति से जोड़कर देखा।

विशेषज्ञ क्या मानते हैं?

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती ताकत के कारण अब भारत से जुड़ी टिप्पणियों पर कई देश तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं। ईरान की यह प्रतिक्रिया केवल ट्रंप पर हमला नहीं, बल्कि भारत के प्रति सम्मान दिखाने का संकेत भी मानी जा रही है।

भारत पर ट्रंप की टिप्पणी ने विवाद खड़ा किया, लेकिन ईरान के जवाब ने साफ कर दिया कि भारत की वैश्विक छवि और महत्व को नजरअंदाज करना आसान नहीं है। यह मामला दिखाता है कि अब भारत को लेकर वैश्विक मंच पर प्रतिक्रिया पहले से कहीं अधिक तेज़ और मुखर हो चुकी है।

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